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28 फरवरी, 2020|1:14|IST

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रासुका में निरुद्ध युवकों को रिहा करो वरना आंदोलन : चंद्रशेखर

रासुका में निरुद्ध युवकों को रिहा करो वरना आंदोलन : चंद्रशेखर

1 / 4भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने दो अप्रैल की हिंसा के बाद रासुका निरुद्ध एससी वर्ग के तीनों युवकों को तत्काल रिहा करने और उन पर लगे मुकदमे वापस लेने को लेकर प्रशासन को चेतावनी दे डाली...

रासुका में निरुद्ध युवकों को रिहा करो वरना आंदोलन : चंद्रशेखर

2 / 4भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने दो अप्रैल की हिंसा के बाद रासुका निरुद्ध एससी वर्ग के तीनों युवकों को तत्काल रिहा करने और उन पर लगे मुकदमे वापस लेने को लेकर प्रशासन को चेतावनी दे डाली...

रासुका में निरुद्ध युवकों को रिहा करो वरना आंदोलन : चंद्रशेखर

3 / 4भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने दो अप्रैल की हिंसा के बाद रासुका निरुद्ध एससी वर्ग के तीनों युवकों को तत्काल रिहा करने और उन पर लगे मुकदमे वापस लेने को लेकर प्रशासन को चेतावनी दे डाली...

रासुका में निरुद्ध युवकों को रिहा करो वरना आंदोलन : चंद्रशेखर

4 / 4भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने दो अप्रैल की हिंसा के बाद रासुका निरुद्ध एससी वर्ग के तीनों युवकों को तत्काल रिहा करने और उन पर लगे मुकदमे वापस लेने को लेकर प्रशासन को चेतावनी दे डाली...

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भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने दो अप्रैल की हिंसा के बाद रासुका निरुद्ध एससी वर्ग के तीनों युवकों को तत्काल रिहा करने और उन पर लगे मुकदमे वापस लेने को लेकर प्रशासन को चेतावनी दे डाली है। उन्होंने कहा कि एससी वर्गके सम्मान के लिए पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा और दिल्ली में सरकार को घेरा जाएगा।

भीम आर्मी प्रमुख की जनसभा को प्रशासन ने कलक्ट्रेट में करने की अनुमति दे दी थी। जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष करीब 300 युवाओं की सभा को लेकर कलक्ट्रेट में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। प्रशासन ने इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी भी कुछ खास पुलिस अधिकारियों को सौंपी थी। परिसर में जमा हुए एससी-एसटी के भीम आर्मी समर्थकों के बीच पहुंचे चंद्रशेखर ने कहा कि एससी एसटी समाज के लोग बहुत पहले से उत्पीड़न सहते हुए आए हैं। उन्हें हर स्तर सताया जाता है, लेकिन वे बोलते तक नहीं है। उन्होंने कहा कि अब ऐसा कदापि नहीं होगा। एससी एसटी के लोगों में जाग्रति आ चुकी है, वे अब किसी का उत्पीड़न नहीं सहेगे।

उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल को पूरे भारत में आंदोलन के दौरान प्रदेश सरकार के इशारे पर निर्दोष एससी युवकों को पीटा गया, जो कि अपना हक मांगने सड़कों पर उतर कर आये थे। पुलिस ने गोलियां चलाकर कई लोगों को भून दिया। विकास मेडियन, उपकार बावरा और अर्जुन को रासुका निरुद्ध कर जेल में डाल दिया गया। पुलिस की गोली से मारे गए अमरेश के परिवार के लोगों को आज तक कोई मदद प्रशासन ने नहीं दी है। कई ऐसे युवा आज भी दलित होने का जुर्म भुगत रहे हैं, जो जेल में बंद है। उन्होंने रासुका में बंद युवकों को बिना शर्त रिहा कराने की मांग की।

चंद्रशेखर ने अपने संबोधन में एक बार भी मायावती या बसपा का नाम नहीं लिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि अब एससी समाज को संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन चलाया जाएगा। भीम आर्मी प्रमुख ने उपस्थित युवाओं से हाथ उठाकर संकल्प कराया कि जब वह दिल्ली में बड़ा आंदोलन करने के लिए जाएंगे तो सभी वहां दिल्ली पहुंचेंगे। इस दौरान भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने पूरे परिसर को चेन बनाकर पूरे जनसभा स्थल को घेरे रखा। भीम आर्मी के दीपक बौद्ध, टीकम बौद्ध आदि स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

अधिवक्ताओं ने किया चंद्रशेखर का स्वागत

मुजफ्फरनगर। अधिवक्ता संदीप कटारियां के नेतृत्व में बंसत बिहार स्थित आवास पर युवा अधिवक्ताओं के दल ने भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर सिंह का स्वागत किया। इस मौके पर मुजम्मिल एड., असद सिद्दीकी एड., अहतेशाम एड., समीर सैफी एड., सैय्यद मुबिश्श्रा हसन एड., अशरफ त्यागी, नफीस पुंडीर एड., तौसीन एउ., शौकीन चौधरी एड. ताज मौहम्मद आदि शामिल रहे।

--शहर में पुलिस रही पूरी तरह से अलर्ट

मुजफ्फरनगर। भीम आमी के संस्थापक की आने की खबर पर पुलिस अधिकारी व खुफिया विभाग पूरी तरह से चौकन्ना रहा। सुबह से ही एसपी सिटी ओमवीर सिंह, सीओ सिटी हरीश भदौरिया के अलावा शहर के तीनों थानों के इंस्पेक्टर गश्त पर निकल गये थे। मुख्य चौराहों पर तो पीएसी के जवान व पुलिस बल पूरी तरह से सक्रिय रहे। कचहरी को तो पूरी तरह से छावनी बना दिया गया था। कलक्ट्रेट परिसर में पुलिस के जवान हथियारों से लैस रहे। हर आने जाने वालों पर भी निगाह रखी जा रही थी। उधर, महावीर चौक भी पुलिस पूरी तरह से अलर्ट रही। हर संदिग्ध व्यक्ति पर नजर रखी जा रही थी।

--भीम आर्मी 2 ने चंद्रशेखर पर साधा निशाना, कई सवाल उठाए

मुजफ्फरनगर में दो अप्रैल के आंदोलन के बाद भीम आर्मी के नाम पर कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा चंदा उगाही किए जाने से नाराज स्थानीय एससी संगठनों के पदाधिकारियों ने मिलकर भीम आर्मी 2 के नाम से संगठन बनाया है। इस भीम आर्मी 2 के संस्थापक अमित शिवाजी गौतम और राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश कटारिया ने भीम आर्मी प्रमुख से कई सवाल पूछे। यह सभी कार्यकर्ता भी कलक्ट्रेट में पहुंचे और अलग खड़े रहे।

उन्होंने सहारनपुर में शब्बीरपुर में हुए दंगे के दलितों के घर जलाए जाने के बाद चंदे की मोटी रकम एकत्र किए जाने और पीड़ित परिवार को सहायता नहीं मिलने के साथ ही दो अप्रैल को एससी के आंदोलन के बाद दलित उत्पीड़न के नाम पर फिर से चंदे में मोटी रकम एकत्र किए जाने, जेल गए युवकों को एक रुपए की सहायता नहीं मिलने का मामला उठाया।

अमित शिवाजी गौतम और लोकेश कटारिया ने कहा कि दो अप्रैल को जो जेल गए वह अपने मामले की पैरवी अपने घर और पशु बेचकर कर रहे हैं। दो अप्रैल के आंदोलन में गोली लगने से मारे गए अमरेश के घर पर भीम आर्मी प्रमुख के जाने के बाद एक लाख की आर्थिक मदद दिए जाने की अफवाह फैलाई गई जबकि एक रुपया भी नही दिया गया। उन्होंने एक दिसंबर की रैली के नाम पर भी पूरे जिले से चंदा एकत्र किए जाने का आरेप लगाते हुए प्रशासन को भी ज्ञापन दिया है।