बोले मुजफ्फरनगर :पांच दिन हो कार्यदिवस तो कम हो काम का बोझ
Muzaffar-nagar News - मुजफ्फरनगर में 9 बैंक यूनियनों ने भारतीय स्टेट बैंक पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने 5 दिवसीय कार्य सप्ताह और नौकरी की सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों का मानना है कि सरकारी नीतियों के कारण उनकी नौकरी और मानसिक स्वास्थ्य पर संकट है।
शहर में 9 बैंक यूनियनों के साझा मंच ने अपनी मांगों को लेकर रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक पर प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर मुजफ्फरनगर के तमाम बैंक कर्मचारी और अधिकारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से शुरू प्रदर्शन मार्च विभिन्न मार्गों से होता हुआ वापस रेलवे रोड स्थित एसबीआई पर आकर सम्पन्न हुआ। यह आंदोलन केवल वेतन विसंगति का नहीं, बल्कि बैंकिंग ढांचे में आ रहे आमूलचूल बदलावों के खिलाफ एक स्पष्ट चेतावनी है। बैंक कर्मी आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
सरकार की नीतियों और बैंक प्रबंधन के कठोर रवैये के बीच ये कर्मचारी केवल मशीन बनकर रह गए हैं। शिव चौक पर इनका प्रदर्शन महज एक भीड़ नहीं, बल्कि इनके भीतर पल रहे इसी मानसिक और पेशेवर दर्द का विस्फोट था। सैकड़ों बैंक कर्मियों ने पांच दिन का वर्किंग डे करने की आवाज बुलंद की। ----- क्यों सुलग रही है विरोध की आग? कर्मचारियों में सबसे बड़ा डर 'नौकरी की असुरक्षा' और 'निजीकरण' को लेकर है। भारत सरकार द्वारा बैंकों के विलय (मर्जर) की प्रक्रिया और दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की घोषणा ने बैंक कर्मियों की रातों की नींद उड़ा दी है। -- विलय का संकट: कर्मचारियों का मानना है कि विलय से शाखाएं बंद होती हैं, जिससे न केवल स्टाफ की कटौती होती है, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। -- पांच दिन वर्किंग की मांग: यह मांग अब केवल आराम की नहीं, बल्कि 'मेंटल हेल्थ' की बन चुकी है। 12वें द्विपक्षीय समझौते में इस पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकारी अधिसूचना में हो रही देरी ने आक्रोश को भड़काया है। -- रेलवे रोड से शहर में विभिन्न मार्गों से होतेा हुआ निकाला विरोध प्रदर्शन सुबह 10 बजे से ही रेलवे रोड स्थित एसबीआई शाखा के बाहर बैंक कर्मी जुटने लगे। प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार और वित्त मंत्रालय के खिलाफ तीखी नारेबाजी की। ------ नारेबाजी के मुख्य केंद्र: -- जो बैंक हमारे पूर्वजों ने बनाए, उन्हें कौड़ियों के दाम बेचना बंद करो। -- 5 डे बैंकिंग हमारा अधिकार है। -- बैंक बचाओ, देश बचाओ। दोपहर करीब 12:30 बजे यह विशाल हुजूम जुलूस की शक्ल में शहर के मुख्य बाजारों से होता हुआ शिव चौक पहुँचा। यहाँ प्रदर्शनकारियों ने जनता को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इसके बाद बैंक कर्मचारी मीनाक्षी चौक, सूजडू चुंगी से होते हुए सरकूलर रोड, महावीर चौक व रेलवे रोड स्थित बैंक कार्यालय पर पहुंचे। ---------------- पांच शिकायतें -- सरकारी अधिसूचना में देरी: समझौते के बावजूद 5-डे बैंकिंग लागू न करना। -- मुजफ्फरनगर की शाखाओं में क्लर्क और कैशियर के पद खाली पड़े हैं, जिससे मौजूदा स्टाफ पर 12-14 घंटे काम का दबाव है। -- स्थायी नौकरियों की जगह अनुबंध पर भर्ती करना, जो बैंकिंग गोपनीयता के लिए खतरा है। -- 1986 के बाद से पेंशन में कोई सुधार नहीं हुआ है, जिससे रिटायर कर्मचारी गरीबी में जी रहे हैं। -- कर्मचारियों का आरोप है कि आम जनता से वसूली सख्त है, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हजारों करोड़ के कर्ज माफ किए जा रहे हैं। पांच समाधान -- पांच दिवसीय कार्य सप्ताह: एलआईसी और आरबीआई की तर्ज पर शनिवार की छुट्टी। -- स्थानीय युवाओं के लिए बैंकों में पारदर्शी भर्ती प्र्त्रिरया शुरू करना। -- पुरानी पेंशन योजना की बहाली और पारिवारिक पेंशन में वृद्धि। -- भविष्य में किसी भी बैंक के विलय या निजीकरण पर पूरी तरह रोक। -- बैंक ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों के लिए बेहतर बीमा और सुरक्षा प्रोटोकॉल। --------------------------------------------------------- बैंक यौद्धाओं का दर्द पीएनबी में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक के विलय के बाद ग्राहकों की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन स्टाफ आधा रह गया। गौरव का दर्द यह है कि वे एक साथ तीन बैंकों के पुराने रिकॉर्ड और नए ग्राहकों के दबाव के बीच पिस रहे हैं। गौरव किशोर (पीएनबी) यूनियन बैंक में आंध्रा और कॉर्पोरेशन बैंक के समाहित होने के बाद तकनीकी दिक्कतें और कार्यप्रणाली का तालमेल बैठाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। वे कहते हैं, हम बैंक को नंबर-1 बनाने में जुटे हैं, और सरकार इसे निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। अजय (यूनियन बैंक) सरकार की हर जन कल्याणकारी योजना (जनधन, मुद्रा, पेंशन) का सबसे ज्यादा बोझ एसबीआई पर है। वे कहते हैं कि आम जनता की सेवा करते-करते वे अपने परिवार को समय नहीं दे पा रहे, ऊपर से 5 डे वर्किंग की फाइल दफ्तरों में धूल फांक रही है। जितेन्द्र बालियान (एसबीआई) बैंक ऑफ इंडिया जैसे मंझले बैंकों पर निजीकरण की तलवार सबसे पहले लटकती दिखती है। उनका दर्द नौकरी की सुरक्षा को लेकर है। विकास कुमार (बैंक ऑफ इंडिया) बैंक कर्मी दिन भर काउंटर संभालता है और शाम को उसे फील्ड में जाकर बड़े बकाएदारों से रिकवरी के लिए जूझना पड़ता है। सुरक्षा के अभाव में फील्ड में जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। ओमवीर सिंह (इंडियन ओवरसीज बैंक) छोटे बैंकों में तकनीकी अपग्रेडेशन धीमा है, जिससे ग्राहकों की नाराजगी का सामना सीधे तौर पर काउंटर पर बैठे कर्मचारी को करना पड़ता है। राहुल कुमार (यूको बैंक) रोहाना जैसे ग्रामीण क्षेत्र का दर्द अलग है। यहाँ बिजली की किल्लत, इंटरनेट की समस्या और किसानों को तकनीकी बैंकिंग से जोड़ने का भारी दबाव है। ग्रामीण जनता के गुस्से को शांत करना उनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा बन गया है। फूल कुमार (रोहाना एसबीआई) सालों की सेवा के बाद भी पेंशन की विसंगतियां दूर नहीं की जा रही हैं। उनकी मांग भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी है। रूद्र प्रताप सिंह (केनरा बैंक) जिला सहकारी बैंकों को मुख्यधारा की बैंकिंग से अलग-थलग रखा जा रहा है। वे सीधे तौर पर किसानों से जुड़े हैं, फिर भी उन्हें कमर्शियल बैंकों जैसी सुविधाएं और सम्मान नहीं मिल पा रहा है। यशवीर सिंह, सहकारी बैंक बैंकों के निजीकरण होने से बैंक कर्मचारियों के भविष्य पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। एक तो पहले से ही बैंक कर्मियों पर सबसे अधिक काम करने का दबाव है, ऊपर से काम करने के घंटे भी सबसे अधिक हैं। मनोज कुमार, जिला सहकारी बैंक सरकार ने बैंककर्मियों की मांग को काफी समय पूर्व ही मान लिया था, लेकिन इसे लागू अभी तक नहीं किया गया है। बैंकोंकर्मचारियों की मंगलवार को आहूत हड़ताल से बैंक में काम नहीं हो पाया, लेकिन बैंक मैनेजर व बड़े अधिकारियों वे ग्राहकों से फोन पर वार्ता करते हुए अपने कुछ कामकाज जरूर निपटाए। अनिल कुमार सिंह, एलडीएम -------------------------------------------------------- बैंक यूनियनों की हड़ताल क्यों? मंगलवार को देशभर में बैंकिंग कामकाज पर असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 27 जनवरी को देश भर में हड़ताल करने का फैसला किया है. उनकी डिमांड है कि सप्ताह में 5 दिन के काम का नियम तुरंत लागू किया जाना चाहिए, जिससे बैंक कर्मचारियों को दो दिन अवकाश मिल सके। बैंक यूनियनों के मुताबिक, केंद्र सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन से लंबे समय से इस मुद्दे पर कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक हमारी मांगों को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा सका है। यूनियनों का कहना है कि दूसरे सरकारी विभागों की तरह ही बैंकों में भी वर्क-लाइफ बैलेंस जरूरी है। 23 जनवरी को हुआ था ऐलान, ये काम प्रभावित गौरतलब है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस 9 यूनियनों की मेन बॉडी है। बीते 23 जनवरी को अपनी पांच दिन के वर्क वीक की मांग को लेकर यूनियन ने चीफ लेबर कमिश्नर के साथ एक बैठक की थी, लेकिन कोई हल न निकलने के बाद देशव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया था। अगर इस हड़ताल से प्रभावित होने वाले कामकाजों की बात करें, तो बैंक ब्रांच में जाकर नकदी जमा कराने से लेकर पैसों की निकासी तक के काम में रुकावट आई। इसके अलावा ब्रांचों में ग्राहकों की सहायता के लिए मौजूद कस्टमर सर्विस से लेकर बैंक लोन और अन्य डॉक्यूमेंटेशन से जुड़े काम पर असर देखने को मिला। प्राइवेट बैंकों में नहीं होगा कार्य प्रभावित एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक समेत अन्य प्राइवेट बैंकों का कामकाज भी प्रभावित होने की आशंका नहीं है, क्योंकि बैंक यूनियंस की हड़ताल में इन निजी बैंकों के कर्मचारी शामिल नहीं हैं। ------------------------------------------------ एसबीआई पर नौं बैंक यूनियनों ने किया प्रदर्शन मुजफ्फरनगर। रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर बैंक कर्मचारी एवं अधिकारियों के 9 बैंक यूनियनों के साझा मंच यूएफ.बी.यू. के बैनर तले एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शन शुरू करते हुए अध्यक्ष साथी आरपी शर्मा (जिला मंत्री यू.पी.बी.ई.यू. मुजफ्फरनगर) ने बताया कि पिछले द्विपक्षीय समझौते 2024 के अंतर्गत यूनियन की बैंक प्रबंधन से बैंकों में सप्ताह में 5 दिन बैंकिंग होने पर सहमति हो गई थी, जिसके लिए बैंककर्मी प्रतिदिन और अधिक समय तक काम करने के लिए भी सहमत थे और यह विषय केंद्रीय सरकार को संस्तुति सहित भेज दिया गया था, परंतु दुर्भाग्य है कि सरकार ने इसके प्रति उदासीनता दिखाते हुए अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। आंदोलन करने पर बार-बार झूठे आश्वासन दिए गए तो यूनियन के समक्ष हड़ताल सहित संघर्ष करने के अलावा कोई चारा नहीं छोड़ा गया तदानुसार मंगलवार को सभी कर्मचारी बैंक कर्मचारी व अधिकारी एक दिवसीय हड़ताल पर रहें। प्रदर्शन को तेजराज गुप्ता अध्यक्ष, पीएनबीपीए, मुकेश भार्गव, सी.ओ. कन्वीनर यू.एफ.बी.यू. गौरव किशोर, ए.आई.पी.एन.बी.ओ.ए.मु.नगर के अध्यक्ष फतेह सिंह, साथी सचिन चौधरी डी.जी.एस. मेरठ माड्यूल स्टेट बैंक, जोनल सेक्रेटरी एसबीआई साथी अनंगपाल, ब्रांच सेक्रेटरी एसबीआई जितेंद्र बालियान, कृष्णा रॉयल, उमेश,यशवीर सिंह जिला सहकारी बैंक ने संबोधित किया। प्रदर्शन में उपस्थित सैकड़ो बैंक कर्मचारी एवं अधिकारियों ने सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाकर अपना रोष प्रकट किया। बैंक कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए रेलवे रोड स्थित बैंक शखा से रोडवेज, प्रकाश चौक, शिव चौक, मीनाक्षी चौक, सूजडू होते हुए वापस परिक्रमा मार्ग, महावीर चौक, प्रकाश चौक होते हुए रेलवे रोड स्थित एसबीआई पर आकर समाप्त हुआ। प्रदर्शन को सफल बनाने में राजीव जैन, बी. के. सूर्यवंशी, रविंद्र सिंह, डी.के. बंसल, प्रदीप मलिक, संजय, कपिल, मोनू, राजेश, रजनीश गुप्ता, दीपांकर, अभिलाष, अनुज शर्मा, संजीव जैन आदि का विशेष सहयोग रहा।

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