
शादी का कार्ड और बम से उड़े हाथ से पुलिस के हत्थे चढ़ा हत्यारा, 40 साल से था फरार
गोंडा में 40 साल से फरार हत्यारे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शादी के कार्ड और बम से उड़े हाथ के जरिए पुलिस को हत्यारे तक पहुंचने में आसानी हो गई।
कानपुर में पांच साल पहले उसके नाम से आया शादी का कार्ड और बम से हाथ उड़ने की जानकारी पुलिस को न मिलती तो शायद 40 साल से फरार हत्यारा पुलिस के हत्थे न चढ़ता। इन्हीं दो सुरागों के आधार पर फीलखाना पुलिस ने प्रेम कुमार को गोंडा से गिरफ्तार कर लिया। अब उसकी उम्र 70 साल से अधिक है। प्रेम कुमार और उसके तीन साथियों ने फीलखाना थाना क्षेत्र के पटकापुर में 1982 में युवक की बम बरसाकर हत्या कर दी थी। इसमें उसका भी हाथ उड़ गया था। मामले में चारों को उम्रकैद की सजा हुई थी। वर्ष 1985 में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद प्रेम कुमार लापता हो गया था। हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।
पटकापुर निवासी पर्वत नाम के एक युवक की नाला रोड कूड़ाघर चौराहे पर रंजिश में बम बरसाकर हत्या कर दी गई थी। 22 दिसंबर 1982 को हुई इस हत्या में बंगाली मोहाल में किराये पर रहने वाले प्रेम कुमार उर्फ पप्पू समेत उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। सेशन कोर्ट से उम्रकैद की सजा मिलने के बाद चारों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। वर्ष 1985 में सभी को जमानत पर रिहा किया गया था। जमानत के बाद अन्य बाकी तीन तो हाईकोर्ट में पेश होते रहे लेकिन प्रेम कुमार उर्फ पप्पू फरार हो गया।
कोर्ट लगातार उसे तलब कर रही थी। कई साल पुराना मामला होने की वजह से पुलिस के पास उसका कोई रिकॉर्ड भी नहीं था। दोषियों को सजा होने के बाद पुलिस मामले भी बंद कर चुकी थी लेकिन हाईकोर्ट से लगातार वारंट और सम्मन जारी हो रहे थे। पुलिस हाईकोर्ट में तीन बार शपथपत्र दे चुकी है कि प्रेम कुमार को खोजा जा रहा है। एसटीएफ, एलआईयू से भी सूचना साझा की गई लेकिन वह नहीं मिला।
नाम से दिया धोखा पर बम से उड़ा हाथ कैसे छिपाता
डेढ़ माह पहले फिर से कोर्ट से वारंट आने के बाद डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने प्रेम कुमार को पकड़ने के लिए टीम बनाई। इसके बाद बंगाली मोहाल में रहने वाले लोगों से पुलिस ने पूछताछ की पर कुछ पता नहीं चला। इसी दौरान एक बुजुर्ग के पास से प्रेम कुमार और उसके रिश्ते के भतीजे के नाम 2020 में आया शादी का कार्ड मिला। एसीपी आशुतोष सिंह ने बताया कि इस कार्ड में दिए गए नंबरों पर पुलिस ने संपर्क किया। उनसे प्रेम के भतीजे के लखनऊ में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने लखनऊ में जाकर पूछताछ की तो उसने बताया कि प्रेम कुमार गोंडा में है। हालांकि उसका नाम प्रेम कुमार नहीं बल्कि प्रेम प्रकाश है। इसके बाद पैतृक गांव का पता लगने के बाद पुलिस की टीम गोंडा पहुंची।
गोंडा पहुंचने पर भी पुलिस को प्रेम कुमार का पता नहीं चला। लोगों को बताया गया कि उसके एक हाथ नहीं है। इसके बाद पता चला कि ऐसा शख्स गोंडा के गांव बिरतिहन पुरवा कोतवाली व तहसील कर्नलगंज में अपने गांव में परिवार के साथ रहकर खेती करता है। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच कर रहे एसआई आशुतोष दीक्षित ने बताया कि बम चलाने में आरोपित का दायां हाथ भी जख्मी हो गया था। पुलिस के पास उसकी कोई फोटो नहीं थी, ऐसे में यही साक्ष्य उसकी गिरफ्तारी का आधार बना है।
टीम को 25 हजार रुपये का मिलेगा इनाम
40 साल से फरार प्रेम कुमार को गिरफ्तार करने वाली टीम के सदस्य फीलखाना थाना प्रभारी शरद तिलारा, इंस्पेक्टर क्राइम जावेद अहमद, एसआई आशुतोष दीक्षित, दीपक शर्मा, हेड कांस्टेबल राम औतार सिंह और कांस्टेबल सिद्धांत को डीसीपी पूर्वी ने 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की है।





