आखिरी साबित हुई अनामिका से मां की सुबह की बात, लखनऊ अग्निकांड ने तोड़ दिया सिलसिला
Lucknow Fire Tragedy : लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले युवाओं में कोलकाता की 30 साल की अनामिका भी शामिल है। अनामिका की मां रोज सुबह उनसे बात करती थीं। परिवार की सुबह की शुरुआत मां-बेटी की इसी बातचीत से होती थी लेकिन सोमवार को लगी इस भीषण आग ने यह सिलसिला हमेशा के लिए तोड़ दिया।

Lucknow Fire Tragedy : लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी की चार मंजिला इमारत में सोमवार को लगी भीषण आग ने न सिर्फ 15 जिंदगियां ली लीं बल्कि उनके परिवारों के सपनों को जलाकर राख भी कर दिया। हादसे में मारे गए बच्चों में से एक अनामिका की मां के लिए सोमवार की सुबह हुई उससे बात आखिरी साबित हुई। अनामिका कोलकाता के बेहाला की थी। वहां रहने वाले सामंत परिवार के लिए रोज सुबह की शुरुआत मां और बेटी के बीच होने वाली फोन कॉल के साथ होती थी। सोमवार को भी ऐसा ही हुआ था लेकिन शाम तक, यह रोज का सिलसिला हमेशा के लिए टूट गया।
हावड़ा (कोलकाता) जिले के एक गांव की 30 साल की अनामिका सामंत सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग में मारे गए लोगों में शामिल थीं। वह पिछले तीन सालों से लखनऊ में काम कर रही थीं। उनकी मां सुलेखा सामंत, अपनी आखिरी बातचीत को याद करते हुए आंसू रोकने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने कहा, ‘उसने सोमवार सुबह मुझसे बात की थी। हम रोज बात करते थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह हमारी आखिरी बातचीत होगी।’ परिवार के सदस्य-उनके माता-पिता विश्वनाथ और सुलेखा, भाई आकाश और चाचा पलाश कोलकाता पुलिस से इस दुखद घटना की खबर मिलने के बाद लखनऊ पहुंचे। वे मंगलवार को शहर पहुंचे, और किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहे थे। इसके बजाय, उन्हें शव गृह में एक दिल दहला देने वाली सच्चाई का सामना करना पड़ा।
दूर रहकर भी परिवार के एक-एक सदस्य का ख्याल रखती थी अनामिका
अनामिका के शव की पहचान करने के मुश्किल अनुभव को बताते हुए परिवार के एक सदस्य ने कहा, ‘सिर्फ़ उसका चेहरा दिख रहा था। हम उसी से उसे पहचान पाए। उसका बाकी शरीर जल चुका था।’ परिवार के लिए यह नुकसान इसलिए भी बहुत मुश्किल है क्योंकि उन्होंने हाल ही में साथ समय बिताया था। कुछ हफ़्ते पहले ही, जून में, परिवार मनाली गया था, जहां की यादें अब रुलाती हैं। रिश्तेदारों ने अनामिका को एक देखभाल करने वाली बेटी बताया, जो काम के सिलसिले में सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद अपने परिवार से गहराई से जुड़ी हुई थी। घर पर उसकी रोजाना की कॉल उसकी मां के लिए एक प्यारी आदत बन गई थी, और परिवार उसकी शादी की तैयारी कर रहा था। लखनऊ में जरूरी औपचारिकता पूरी होने के बाद, परिवार उसके शव को पश्चिम बंगाल ले जाने की तैयारी कर रहा है। उसका अंतिम संस्कार हावड़ा ज़िले में उनके पैतृक गांव गढ़बालिया में किया जाएगा, जहां रिश्तेदार और ग्रामीण उसके घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं।
एसआईटी कर रही है अग्निकांड की जांच
सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित सेंटर में आग लग गई थी, जिसके बाद कई दमकल वाहनों और आपात प्रतिक्रिया दलों के साथ बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। आग फैलने पर कई छात्र और स्टाफ सदस्य इमारत के अंदर फंस गए थे। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से ज़्यादातर कोचिंग सेंटर से जुड़े युवा थे। कई अन्य लोग आग में झुलस गए और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में उनका इलाज चल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने आग लगने की वजह का पता लगाने और सुरक्षा उपायों में किसी तरह की लापरवाही की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच के आदेश दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


