बेटे की हत्या के बाद मां ने लड़ी कोर्ट में लड़ाई, आठ साल बाद मिला इंसाफ, चार अभियुक्तों को उम्रकैद
बुलंदशहर में एक मां ने अपने नाबालिग बेटे की हत्या के मामले में न्यायालय में करीब आठ साल तक लंबी लड़ाई लड़ी और हत्यारों को सजा दिलाई। मामला अनूपशहर कोतवाली क्षेत्र के गांव रूढ बांगर का है।

Bulandshahr News: एक मां ने अपने नाबालिग बेटे की हत्या के मामले में न्यायालय में करीब आठ साल तक लंबी लड़ाई लड़ी और हत्यारों को सजा दिलाई। मामला अनूपशहर कोतवाली क्षेत्र के गांव रूढ बांगर का है। गांव के 17 वर्षीय जोगेंद्र की गला दबाकर हत्या करने के बाद आरोपियों ने शव को नीम के पेड़ पर लटका दिया था। पुलिस ने मुकदमा भी कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया था। न्यायालय ने चार दोषियों को आजीवन कारावास और एक लाख दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाकर जेल भेज दिया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रवेन्द्र सिंह लोधी ने बताया कि 10 जुलाई 2016 को गांव रूढ बांगर में जोगेंद्र पुत्र सत्यदेव का शव नीम के पेड़ पर लटका मिला था। गांव में सनसनी फैल गई थी। जोगेंद्र के पिता सत्यदेव ने आरोप लगाया था कि जोगेंद्र की बाइक से टक्कर हो जाने के कारण प्रवीन का पैर टूट गया था। इस बात को लेकर रंजिश मानते हुए कुलवीर, लाला उर्फ सतेंद्र, प्रवीन और छोटे ने मिलकर जोगेंद्र की गला दबाकर हत्या कर दी। शव को नीम के पेड़ से लटका दिया था। आरोपी रात में जोगेंद्र को बहाने से ले गए थे। तीन दिन बाद 13 जुलाई 2016 को सतेंद्र ने बताया था कि उनके बेटे की गला दबा कर हत्या कर दी है। नीम के पेड़ पर शव लटका हुआ है।
कोर्ट के आदेश पर दो साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा दिया, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया। करीब दो साल बाद पीड़ित पिता ने न्यायालय के आदेश पर 29 जुलाई 2018 को अनूपशहर कोतवाली में चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मामला अनूपशहर स्थित अपर सत्र न्यायालय में विचाराधीन था। न्यायाधीश राजेश कुमार ने साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर कुलवीर, लाला उर्फ सतेंद्र, प्रवीन, छोटे को दोषी मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास तथा प्रत्येक पर एक लाख 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाकर जेल भेज दिया।
मां ने लड़ी कानूनी लड़ाई, हत्यारों को दिलाई सजा
न्यायालय में मुकदमे के विचारण के दौरान जोगेंद्र के पिता की मृत्यु हो गई। घर में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जोगेंद्र की मां सुनीता ने बेटे को न्याय दिलाने के लिए आठ साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। न्यायालय द्वारा हत्यारों को सजा सुनाए जाने पर मां सुनीता की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि उन्हें कानून पर पूरा विश्वास था। समय जरूर लगा, लेकिन आज मेरे बेटे को सही मायने में न्याय मिला है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
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यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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पत्रकारिता का सफर
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करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
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है।


