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यशिका दिखाती और कमाल, बस एक सवाल का मलाल

यशिका दिखाती और कमाल, बस एक सवाल का मलाल

मुझे पता है नंबर कहां कटे हैं। विज्ञान के परीक्षा के दिन ही पता चल गया था कि एक नंबर तो कटेगा ही। ऐसा नहीं था कि वह प्रश्न नहीं आता था। बस अनजाने में छूट गया। उस एक प्रश्न के छूटने की कसक आज भी है। यह कहना है जिला टॉपर सेंट मेरीज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा यशिका रस्तोगी का।

हिन्दुस्तान ने बुधवार को यशिका से खास बातचीत की तो उनके मन की कसक सामने आई। देश की टॉपर बनने में वह कहां चूकीं। इस सवाल पर यशिका ने कहा कि मुझे पता है कहां नंबर कटा है। खासकर विज्ञान विषय में। यशिका ने बताया कि विज्ञान के पेपर में कई पार्ट थे। लास्ट पार्ट के प्रश्न के अंदर भी तीन छोटे-छोटे प्रश्न थे। तीसरे प्रश्न में पैंक्रियाज के फंक्शन बताने थे। जिसे वो अनजाने में देख ही नही पाईं। जब घर आईं तब उस प्रश्न को देखा। तभी एहसास हुआ कि एक नंबर का प्रश्न उनसे छूट गया। विज्ञान में उनके वही एक नंबर कम हैं। यशिका को विज्ञान में 100 में से 99 आए हैं। हिन्दी में पद परिचय में कन्फ्यूजन से एक नंबर गए तो गणित में कुछ सिली मिस्टेक का यशिका ने अंदेशा जताया। अंग्रेजी का पेपर बहुत अच्छा हुआ था लेकिन एक नंबर कहां कटे इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। यशिका का कहना है कि लिटरेचर में शत प्रतिशत कैलकुलेशन कर पाना मुश्किल होता है।

यू-ट्यूब बना यशिका का गाइड

बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान यू-ट्यूब यशिका का गाइड बना। जी हां, विषय संबंधित समस्याओं का हल ढूंढने के लिए यशिका ने यू-ट्यूब का सहारा लिया। यू-ट्यूब पर वह अपनी समस्याएं डालतीं। जिससे तुरंत उन्हें उसका हल मिल जाता। इससे समस्याएं खत्म होती गईं और उनकी तैयारी बढ़िया होती गई।

बुआ से मिली टॉपर बनने की प्रेरणा

यशिका ने बताया कि टॉपर बनने की प्रेरणा उन्हें अपनी बुआ से मिली है। उनकी बुआ माला रस्तोगी ने भी 1995 में प्रभा देवी इंटर कालेज यूपी बोर्ड में टॉप किया था। यशिका के पिता राजेश रस्तोगी ने बीकॉम किया है। जबकि माता शोभा रस्तोगी ने हिन्दी से एमए किया है। यशिका की दादी शकुंतला रस्तोगी ने इंटर तक की पढ़ाई कर कुछ समय प्राइमरी स्कूल में बतौर शिक्षिका नौकरी भी की थी। घर की महिलाएं यशिका की प्रेरणा स्त्रोत हैं। यशिका की रोल मॉडल उनकी मां हैं।

बोर्ड परीक्षा में सफलता के टिप्स

- रेगुलर स्टडी और टाइम मैनेजमेंट करें।

- टाइम मैनेजमेंट तभी हो सकेगा, जब शुरुआत से ही स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान दिया जाए।

- ट्यूशन में जाकर समय बर्बाद करने से अच्छा है स्कूल के बाद घर पर सेल्फ स्टडी की जाए।

- दिसम्बर तक सिलेबस खत्म कर रीविजन करना शुरू कर दें। साथ ही सैंपल पेपर भी हल करें।

- सभी कुछ अंतिम समय के लिए न छोड़ें बल्कि शुरुआत से ही टारगेट बनाएं।

- सोशल साइट्स का यूज करें, मिसयूज नहीं।

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