बायोमेडिकल वेस्ट के दुष्प्रभावों की दी जानकारी
आईएफटीएम विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। डॉ. राशी श्रीवास्तव ने बायोमेडिकल वेस्ट के दुष्प्रभावों और सही निस्तारण के महत्व पर चर्चा की। डॉ. तंजील अहमद ने प्रतिभागियों को सुरक्षित प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का उद्देश्य बताया।

आईएफटीएम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट विषय पर कार्यशाला हुई। इसमें मुख्य वक्ता व स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की शिक्षिका डॉ. राशी श्रीवास्तव ने बायोमेडिकल वेस्ट के दुष्प्रभावों एवं स्वास्थ्य सुरक्षा तथा इसके सही निस्तारण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई। बताया कि अस्पतालों एवं प्रयोगशालाओं से निकलने वाले अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है, ताकि संक्रमण एवं पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। वहीं कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. तंजील अहमद ने कहा कि प्रतिभागियों को बायोमेडिकल अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन, स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
वर्तमान समय में बायोमेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन स्वास्थ्य संस्थानों एवं शैक्षणिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। एनएसएस इकाई के समन्वयक व स्कूल ऑफ साइंसेज के निदेशक डॉ. बीके सिंह ने भी विचार रखे। इस मौके पर डॉ. उत्कर्ष त्यागी, डॉ. स्वप्न कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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