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इस रफ्तार से चला काम,तो फरवरी तक भी नहीं हो पाएगा पूरा

इस रफ्तार से चला काम,तो फरवरी तक भी नहीं हो पाएगा पूरा

लोकोशेड पुल के काम को लेकर रेल अफसरों के दावों की अब हवा निकलने लगी है। पहले दिसंबर अंत तक फिर जनवरी में काम पूरा करने की बात कही गई लेकिन वर्तमान में जितना काम हुआ है उस हिसाब से काम फरवरी से पहले पूरा होता नहीं दिख रहा है। काम की आलम यह है कि एक सप्ताह पहले खंभे पर गर्डर रखने की तैयारी हुई जिसमें आज तक आठ में से सिर्फ दो गर्डर ही रखे जा सके है,वहीं ट्रैक किनारे पाइलिंग का काम भी सुस्त है।

दिल्ली रोड से निकालने वाले ट्रैफिक के लिए लोकोशेड एक महत्वपूर्ण रास्ता है, इसी मकसद से 2015 में इस पुल को चौड़ा करने की शुरुआत हुई लेकिन डेढ़ साल में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट को तीन साल गुजर चुके ,पर अभी तक काम पूरे होने के आसार हाल फिलहाल में नहीं दिख रहे। एक सप्ताह पहले रेलवे ने तैयार खंभों पर गर्डर की तैयारी शुरू हुई और आज की तारीख तक सिर्फ दो से तीन गर्डर ही रखे जा सके है,जबकि बात आठ गर्डर रखने की कही गई थी। काम की धीमी रफ्तार से सबसे ज्यादा दिक्कत यहां से गुजरने वाले लोगों को हो रही है। वहीं पाइलिंग का काम भी तेजी से न होने से काम तेजी से होता नजर नहीं आ रहा है।लोकोशेड लॉग बुक रविवार 16 दिसंबर सप्ताह भर पहले गर्डर बिछाने के काम में अब सिर्फ तीन गर्डर रखे गए आठ दिन पहले शुरू हुआ काम,अभी एक पाइिलंग का काम भी पूरा नहींरेलवे ट्रैक किनारे बनने पिलर के काम में भी लग जाएंगे दो महीनेरेलवे के बनाए हिस्से को इसके बाद सेतु निगम के इंजीनियर जोड़ेंगे फैक्ट फाइल:लोकोशेड पुल की शुरुआत : अगस्त 2015 कुल लागत : 40 करोड़ रेलवे हिस्से की लंबाई : 112 मीटर रेलवे को बनाने है : 5 फाउंडेशन अभी तक बने हैं : 3फाउंडेशन लाइन के ऊपर बनेगा पुल: 47.5 मीटर

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