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एक साथ चार मौतों से बिलारी के हाजीपुर गांव में छाया मातम

हर तरफ रुदन के स्वर। हर आंख नम। चारो ओर चीख-पुकार। आंखें डबडबाई और गला रुंधा। हाजीपुर गांव में ढांग गिरने से चार युवतियों की मौत से मातम छा गया। ढांढस बंधाने वालों की आंखें भर आईं। कौन किसे ढांढस बंधाए और कौन सांत्वना दे। उस समय पूरा गांव रो पड़ा जब एक साथ चार अर्थियां गुजरीं। हाजीपुर गांव में मिट्टी की ढांग गिरने से युवतियों की मौत से मातम छा गया। हर आंख नम थी। कई लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। सभी मृतकों के पिता मजदूरी व खेतीबाड़ी करते हैं। हादसे के बाद पिंकी की मां मीना बेहोश हो गई। पिंकी दो भाई, तीन बहनों में सबसे बड़ी थी। किरन की मां मोहनदेई की मौत कई साल पहले हो चुकी थी। पिता हरपाल हिमाचल में मजदूरी करते हैं। यह एक सप्ताह पहले ही मैनाठेर क्षेत्र के गांव नरोदा से अपनी बुआ पूनम के घर आई हुई थी। स्वाति के पिता भी मजदूरी करते हैं। वह तीन बहनों में सबसे छोटी थी। मां कमलेश अपनी बेटी स्वाति का शव देखकर गश खाकर बेहोश हो गई। जबकि ममता दो भाई व चार बहनों में सबसे छोटी थी। ग्रामीणों की मानें तो वह पढ़ने में भी होशियार थी। उसको गांव वाले बिटिया कहकर पुकारते थे। मां राजवती बेटी के शव को देखकर दहाड़े मार रही थी। राजवती की हालत देखकर पड़ोसियों की आंखें भर आईं।

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  • Web Title:Weeds in Hajipur village with four deaths