
फी रेगुलेटरी एक्ट के तहत स्कूलों में तय सीमा में ही बढ़ेगी फीस
Moradabad News - वर्ष 2018 में बनाए गए फी रेगुलेटरी एक्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में स्कूलों को हर वर्ष अधिकतम 5% फीस बढ़ाने की अनुमति है। इस वर्ष, सभी स्कूलों को केवल 7.55% तक फीस बढ़ाने के लिए बाध्य किया गया है। इसके साथ ही, एनसीईआरटी किताबें भी अनिवार्य की गई हैं।
सत्र 2015-16 को आधार मानते हुए वर्ष 2018 में तत्कालीन डिप्टी सीएम व शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा द्वारा विधान सभा में फी रेगुलेटरी एक्ट बनाया गया था। इस अधिनियम के तहत उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल हर वर्ष केवल महंगाई दर (सीपीआई) में अधिकतम पांच प्रतिशत जोड़कर ही फीस बढ़ा सकते हैं। इसी नियम के अनुसार पिछले दो-तीन वर्षों में स्कूलों द्वारा अधिकतम लगभग 11 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ाई जा सकती थी। मुरादाबाद एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स के महासचिव नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि फी रेगुलेटरी एक्ट के अनुसार नए प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की फीस निर्धारित करने का अधिकार स्कूलों को दिया गया है, इसलिए उनकी फीस उसी कक्षा के पुराने विद्यार्थियों से अलग हो सकती है।
स्कूलों द्वारा इस कानून का सख्ती से पालन किया जाता है और इसकी जानकारी प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा अभिभावकों को लगातार दी जाती है। सरकार द्वारा जारी सीपीआई के अनुसार इस वर्ष समस्त स्कूल केवल 7.55 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ाने के लिए बाध्य होंगे और इससे अधिक वृद्धि नियमों के विरुद्ध मानी जाएगी। बता दे कि जनपद में 70 से अधिक सीबीएसई स्कूल संचालित हैं। एनसीईआरटी लागू होने से मिलेगी राहत नवीन सत्र से स्कूल में एनसीईआरटी भी अनिवार्य कर दी गई है। इसके लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने अभी से तैयारियां तेज कर दी है। किताबों की सूची स्कूलों से लेकर विक्रेताओं को दे दी गई है। ताकि समय से बाजार में किताबें उपलब्ध हो सकें।

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