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जुड़वा टॉपरों की सफलता की कहानी

जुड़वा टॉपरों की सफलता की कहानी

साथ पढ़ाई करना। साथ खेलना। एक ही साथ ओलम्पियाड में हिस्सा लेना और जीत भी हासिल करना। पसंद भी एक, नापंसद भी एक, सपने और लक्ष्य भी एक। जुड़वा टॉपरों की सफलता की कहानी में उनके साथ और समानता की अहम भूमिका है।

जिले में तीसरा स्थान हासिल करने वाले डीपीएस के मो. शारिफ सुल्तान और डीपीएस के सेकेंड टॉपर मो. वासिफ सुल्तान सिर्फ देखने में एक जैसे नहीं लगते बल्कि साथ-साथ टॉपर बनने का भी उन्होंने रिकॉर्ड बनाया है। पढ़ाई में वह एलकेजी से दसवीं तक साथ-साथ रहे। प्रत्येक कक्षा में दोनों एक साथ टॉप भी करते रहे। दसवीं बोर्ड में भी उन्होंने स्कूल के पहले दो टॉपरों में अपनी जगह बनाई। मैथ्स और साइंस ओलम्पियाड में तीसरी से नौवीं तक उन्होंने साथ-साथ सिल्वर और गोल्ड मेडल भी जीते। किसी ने गोल्ड तो किसी ने सिल्वर। जुड़वा भाइयों की इस साथ ने उन्हें बोर्ड परीक्षा में भी स्कूल का टॉपर बनाया। स्कूल की कक्षाओं के बाद वह एक साथ ही पढ़ाई करते थे। शारिफ और वासिफ का कहना है कि उन्होंने टाइम टेबल बनाकर कंबाइन्ड स्टडी शुरू किया। इसका उन्हें बहुत फायदा मिला। साथ में पढ़ाई की। साथ में पेपर दिया और फिर साथ में पेपर भी डिस्कस करते रहे। इससे उनके नंबर भी आस-पास ही रहे। दोनों ही भाइयों का लक्ष्य अपनी माता डा. सय्यदा अतिया इमादी और पिता डा. सुल्तान आलम जुबैरी जैसे डॉक्टर बनने का है। दोनों के पसंद भी एक हैं। स्वीमिंग करना और टीवी देखना उनकी पसंद में शामिल है।

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  • Web Title:Twin toppers created story of success