
शुगर के मरीजों को अंधेपन से बचाएंगी एएनएम-आशा
Moradabad News - मुरादाबाद में डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की आंखों में होने वाली डायबेटिक रेटिनोपैथी का खतरा बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की एएनएम और आशा कार्यकत्रियों ने विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर इस समस्या...
मुरादाबाद। शहरों से लेकर गांव-देहात तक डायबिटीज की बीमारी का कहर बढ़ने के चलते इसकी वजह से आंखों में होने वाली डायबेटिक रेटिनोपैथी बीमारी अंधेपन का कारण बन रही है। इस समस्या को फैलने से रोकने में अब स्वास्थ्य विभाग की एएनएम और आशा कार्यकत्रियां आगे आएंगी। इसी मकसद के साथ मंगलवार को उन्होंने सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान में सेवा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित हुए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। जिसमें मुख्य प्रशिक्षक डॉ.ईशा आचार्य, मुख्य वक्ता डॉ. इशा आचार्य, हिमांशु सपरा एवं लोकेश चौहान ने ने उन्हें डायबेटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित मरीजों को चिन्हित करके उन्हें जांच व इलाज के लिए अस्पताल भेजने की तत्परता दिखाने के लिए प्रेरित किया।
बताया कि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को आंखों में अंधेपन की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। इसे डायबेटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। प्री मेच्योर पैदा होने वाले नवजात शिशुओं की भी आंखों की जांच कराने की तत्परता दिखाने पर जोर दिया। समय से पहले जन्मे या कम वजन वाले शिशुओं को रेटिनोपैथी हो सकती है। उनकी आंख के रेटिना में असामान्य रक्त वाहिकाओं का विकास होता है, जिससे स्थायी दृष्टि हानि या अंधेपन का खतरा होता है। इस स्थिति का शीघ्र पता लगाने के लिए नवजात शिशुओं की आंखों की विशेष तौर पर जांच की जाती है। डॉ.आशी खुराना ने कहा कि इस मुहिम से ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह से पीड़ित मरीजों की आंखों में अंधेपन के खतरे को बचाया जा सकेगा। संचालन जनसंपर्क अधिकारी गरिमा सिंह ने किया। कार्यशाला में मोहम्मद बिलाल सिद्दीकी, शब्येंद्र बिश्नोई, सत्य प्रकाश शर्मा, रवि श्रीवास्तव और आयुष, सौरव, अर्चना का सहयोग रहा। डायबेटिक रेटिनोपैथी के लक्षण डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती चरणों में अमूमन, कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन बाद में धुंधली दृष्टि, तैरते हुए धब्बे, रंगों को देखने में परेशानी और रात में देखने में कठिनाई जैसे लक्षण दिख सकते हैं। दृष्टि में बदलाव जो आते-जाते रहते हैं, वह भी एक संकेत हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति है जो दृष्टि हानि और अंधेपन का कारण बन सकती है, इसलिए मधुमेह रोगियों को नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी चाहिए।

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