रमजान में रोजा रखने से रोजेदारों की हर मुराद होती पूरी
Moradabad News - रमजान माह के नवें रोजे के इफ्तार के बाद, रमजान के पहले अशरा की विदाई हुई। अब दूसरा अशरा मगफिरत शुरू होगा। इमाम कारी अब्दुल मुईद ने बताया कि रमजान में रोजा रखने से अल्लाह रोजेदार की मुरादें पूरी करते हैं और यह महीना इबादत और नेक कार्यों के लिए समर्पित है।

रमजान माह के नवें रोजे की इफ्तार के बाद देर रात दसवें रोजे की सहरी के साथ रमजान माह के पहले अशरा रहमत की विदाई हो गई। रविवार रात रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी शुरू हो जाएगा। तहसील इमाम कारी अब्दुल मुईद ने बताया कि कुरआने-पाक के पहले पारे अल़िफ-लाम-मीम की सूरह अल बकरह की आयत नंबर तिरालीस में अल्लाह का इरशाद है और नमाज कायम रखो और जकात दो और रुकूअ करने वालों के साथ रुकूअ (दोनों हाथ घुटनों पर रखकर, सिर झुकाए हुए अल्लाह की बढ़ाई) करो। रोजा पाकीजगी का परचम और इंसानियत का हमदम है, इसलिए इंसानियत भी।
रूहानियत की ता़कत है रोजा, रोजे की ताकत है जकात। इस्लाम में रमजान को पाक मुकद्दस महीना माना जाता है। तहसील इमाम कारी अब्दुल मुईद ने बताया कि रमजान में रोजा रखने से अल्लाह रोजेदार की हर मुराद पूरी करते हैं। माना जाता है कि रमजान रहमत, मगफिरत और बरकतों का महीना है। रमजान में कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें रमजान में जरूर करना चाहिए, इससे आपको कई गुना नेकी मिल सकती है।उन्होंने कहा कि कुरान में रमजान में रोजा रखने का विशेष महत्व बताया गया है। देखा जाए तो यह महीना पूरी तरह से अल्लाह की इबादत और नेक काम करने के लिए समर्पित माना जाता है। इस दौरान रोजाना पांच बार नमाज अदा की जाती है और साथ ही जकात फितरा अदा की जाती है। इन सभी बातों का ध्यान रखने से अल्लाह सबके गुनाह माफ कर देते हैं और व्यक्ति की हर मुराद पूरी होती है।
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