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कहीं वोट न कटवा दें सड़कों के गड्ढे और जाम

कहीं वोट न कटवा दें सड़कों के गड्ढे और जाम

एक तरफ, शहर में मतदान का नया रिकार्ड बनाने की अपीलें शुरू हो गई हैं तो दूसरी तरफ, सड़कों पर बड़े बड़े गड्ढे और ट्रैफिक जाम...से जूझ रही पब्लिक की जुबां पर किसी को वोट नहीं देकर अपना गुस्सा दिखाने की आवाज सुनाई दे रही है।

लंबे समय से शहर के लोग सड़कों पर गड्ढों से जूझ रहे हैं तो जाम ने सभी का बुरा हाल कर दिया है। स्कूल जाने वाले बच्चे हों या सुबह फैक्ट्री जाने के लिए घर से समय पर निकलने वाले कामगार...दफ्तर के लिए घर से निकलने की जल्दी मचाने वाले लोगों को सड़क पर लगने वाला भीषण जाम झकझोर रहा है। जाम के हालात इतने विकट हो गए हैं कि अचानक किसी की तबियत बिगड़ने पर उसे समय से अस्पताल पहुंचाने की गारंटी नहीं रह गई है। शहर में हर किसी की जुबां पर यहां के जबरदस्त जाम की परेशानी सुनाई दे रही है। लोग हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ने को लेकर जनप्रतिनिधियों की बेपरवाही को कोस रहे हैं।

मुरादाबाद फेयर ट्रेड प्राइमरी प्रोड्यूसर एसोसिएशन से जुड़े इकबाल का कहना है कि शहर में एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचना दूभर होता जा रहा है। इस मामले में पुराने शहर के हालात तो बहुत ही खराब हैं। लोगों में सबसे ज्यादा गुस्सा तो इस बात को लेकर है कि हमारे नुमाइंदों को इस समस्या की परवाह ही नहीं है। लालबाग में रहने वाले फहीम मंसूरी का कहना है कि काफी समय से शहर को स्मार्ट बनाने की बातें सुनाई दे रही हैं, लेकिन, जाम की समस्या हर दिन और ज्यादा विकराल होकर सामने आ रही है। रामगंगा विहार में बैंक के रिटायर्ड अफसर अशोक रेहानी का कहना है कि सड़कों पर गड्ढे, चोक नाले इतनी बड़ी समस्या बन गए हैं कि लोगों का भरोसा सिस्टम से उठता जा रहा है। सवाल उठाया कि गुस्से में आकर लोग अगर चुनाव में अपना वोट डालने के लिए नहीं निकलें तो इसके लिए कौन जिम्मेदार माना जाएगा?

लोकोपुल की सुस्त चाल बढ़ाती जा रही गुस्सा

मुरादाबाद में विकास कार्यों के नाम पर ये हाल। तमाम जगहों पर सीवर लाइन डालने के लिए खोद डाली गईं सड़कें और दूसरी तरफ, लोकोपुल के बनने की सुस्त रफ्तार को देखकर कलेजे की चुभन कम होने का नाम ही नहीं ले रही। निर्यातक अतुल भूटानी ने जिम्मेदारों पर ये कहते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया कि हम मुरादाबाद में हैं इसलिए विकास कार्यों के नाम पर हर तरफ अव्यवस्था और सुस्ती झेलने को मजबूर हैं। अगर हम दिल्ली में होते तो लोकोशेड जैसे दस नए पुल बने देख लेते। क्योंकि, दिल्ली एनसीआर में हर छह महीने में नई सड़क और एक साल में नया फ्लाईओवर बनकर तैयार हो जाता है।

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  • Web Title:Pit road and jam to ever vote not cut