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31 मार्च, 2020|4:28|IST

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परमहंस ने सभी धर्मों की एकता पर दिया जोर

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बहोरनपुर नरौली स्थित प्रेम शांति इंटर कॉलेज में वंदना प्रहर में रामकृष्ण परमहंस जयंती की जयंती मनाई गई। वक्ताओं ने उनके विषय में बताया कि वह एक आध्यात्मिक गुरु एक संत एवं उच्च कोटि के विचारक थे। जिन्होंने समाज सुधार के अनेक कार्य किए। मंगलवार को प्रधानाचार्य विजय पाल सिंह राघव ने आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस के विषय में बताया। बताया कि उनका जन्म 1836 में बंगाल प्रांत के हुगली जिले में हुआ था। उनके बचपन का नाम गदाधर था। सात वर्ष की आयु में पिता का निधन हो जाने से उनके सामने परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ा। वह अच्छे गायक और चित्रकार भी थे। उन्होंने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। ईश्वर में अटूट विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने कठोर तप साधना की और भक्ति भाव का जीवन बताया। 1856 में दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी बने । तोतापुरी महाराज के अद्वैत वेदांत की शिक्षा पाई। आध्यात्मिक अनुभूति के कारण लोग पागल समझने लगे। 1859 में उन्होंने शादी शारदा मणि से कर ली। 16 अगस्त 18 86 को कोलकाता के कोसीपोर पूर्व में देह त्याग दी। इस अवसर पर मुनेश पाल सिंह, शंकरलाल, राखी गोस्वामी, आदित्य राघव, सजल राघव, ज्ञानवती, वीर सागर, विशाल कुमार और शुभम आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Paramahamsa emphasized the unity of all religions