Moradabad s Lankesh on the threshold of the world record - विश्व रिकॉर्ड की दहलीज पर मुरादाबाद के 'लंकेश' DA Image

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विश्व रिकॉर्ड की दहलीज पर मुरादाबाद के 'लंकेश'

विश्व रिकॉर्ड की दहलीज पर मुरादाबाद के 'लंकेश'

1 / 3मुरादाबादी शैली की रामलीला के कलाकारों ने देश भर के मंचों पर अपने अभिनय का डंका बजाया है। इस साल भी मुरादाबादी कलाकार अपनी खास शैली और संवाद बोलने के अंदाज से दिल्ली-मुंबई समेत देश भर में सजीव मंचन...

विश्व रिकॉर्ड की दहलीज पर मुरादाबाद के 'लंकेश'

2 / 3मुरादाबादी शैली की रामलीला के कलाकारों ने देश भर के मंचों पर अपने अभिनय का डंका बजाया है। इस साल भी मुरादाबादी कलाकार अपनी खास शैली और संवाद बोलने के अंदाज से दिल्ली-मुंबई समेत देश भर में सजीव मंचन...

विश्व रिकॉर्ड की दहलीज पर मुरादाबाद के 'लंकेश'

3 / 3मुरादाबादी शैली की रामलीला के कलाकारों ने देश भर के मंचों पर अपने अभिनय का डंका बजाया है। इस साल भी मुरादाबादी कलाकार अपनी खास शैली और संवाद बोलने के अंदाज से दिल्ली-मुंबई समेत देश भर में सजीव मंचन...

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मुरादाबादी शैली की रामलीला के कलाकारों ने देश भर के मंचों पर अपने अभिनय का डंका बजाया है। इस साल भी मुरादाबादी कलाकार अपनी खास शैली और संवाद बोलने के अंदाज से दिल्ली-मुंबई समेत देश भर में सजीव मंचन करने में जुटे हुए हैं।

मुरादाबादी शैली में मंचन करते समय जब रावण मुंबई में अट्टहास करता है, तो मराठीभाषी भी रोमांचित हो जाते हैं। हमारे विदेहराज दिल्ली में 'वीरविहीन मही' का विलाप करते हैं, तो राजधानी रो पड़ती है। मुरादाबाद शैली ने मानस-मंचन में दुनियावी पहचान दी है। मानस-मंचन के अहम किरदार लंकेश से दुनियावी शिनाख्त दर्ज कराने वाले वरिष्ठ कलाकार राधेश्याम शर्मा अब तो 'लंकेश' ही हो गए हैं।

विश्व रिकॉर्ड की दहलीज पर अपने 'लंकेश'

शहर के वरिष्ठ कलाकार राधेश्याम शर्मा यूं तो उम्र की उस दहलीज पर हैं जहां अपना आपा भी संभाल पाना कई बार मुश्किल हो जाता है। रेलवे विभाग से रिटायर राधेश्याम शर्मा की देह को अरसे पहले बीमारियों ने ऐसा जकड़ा कि उसे ही स्थायी निवास बना लिया। छह साल से बीमारियों की गिरफ्त के बावजूद वह लंकेश के किरदार के अभिनय को विश्व रिकॉर्ड के निकट पहुंचा दिया है।

राधेश्याम शर्मा 1973 में पहली बार लंकेश बने। दिल्ली के परेड ग्राउंड पर उन्होंने लंकेश की भूमिका निभाई। वहां किरदार में ऐसे उतरे कि लगातार 36 साल तक एक ही मंच अभिनय करने का रिकॉर्ड बनाया। पारिवारिक मित्र बाबा संजीव आकांक्षी बताते हैं कि 'लैंथ ऑफ एक्टिंग रिकॉर्ड' के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में आवेदन की प्रक्रिया जारी है।

मुझे तो रावण से ही सब मिला

राधेश्याम शर्मा यूं तो मानस-मंच पर लंकेश की भूमिका निभाते रहे हैं। इसके बावजूद राम के प्रति उनका स्निग्ध प्रेम ही उन्हें 'लंकेश' की उपाधि दिलाने वाला है। असल जिंदगी में राधेश्याम शर्मा राम के बेहद नजदीक हैं। हालांकि, राधेश्याम शर्मा का मानना है कि रावण की भूमिका के चलते ही मानस की पूर्णता होती है। राधेश्याम शर्मा अपना जन्म ही लंकेश की भूमिका निभाने के लिए होना मानते हैं। आज चल-फिरने में नाकाम होने के बावजूद लंकेश का नाम आते ही भारी-भरकम आवाज में लंकेश के संवाद सुनाते हैं। आवाज में ऐसी भयंकार गर्जना कि संवाद बोलते वक्त किरदार में पूरी तरह उतरते नजर आते हैं।

 

वक्त के साथ बदला मानस-मंचन

राधेश्याम शर्मा कहते हैं कि आधुनिकता में नए प्रयोग के चलते रामलीला बदल गई है। अब पहले जैसी बात कम नजर आती है। कलाकार अभ्यास कम करते हैं। संवाद पार्श्व में बोले जाते हैं। ऐसे में किरदार को संवाद याद ही नहीं होते। मानस को जीने के लिए मानस के किरदार में उतरना जरूरी है। राधेश्याम के मुताबिक रावण का किरदार ही रामायण का असली चरित्र है। बिना रावण के राम सिर्फ राजा हो सकते है। बीमारी के बावजूद लंकेश का मन आज भी रावण के किरदार को हर पल जी रहा है।

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