Moradabad News: राजस्व की धारा 24 में अब इस तरह से पैमाइश करनी होगी
Moradabad News: मुरादाबाद में भूमि पैमाइश में सुधार की दिशा में कमिश्नर आन्जनेय कुमार सिंह ने चेक लिस्ट जारी की है। इससे भूमि विवादों में कमी आने की उम्मीद है। सभी डीएम को निर्देशित किया गया है कि वे इस प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करें। तकनीकी खामियों के आधार पर वादों को निरस्त नहीं करने और वादियों को संशोधन का अवसर देने का भी निर्देश दिया गया है।

Moradabad News: मुरादाबाद में भूमि पैमाइश के लंबित वाद विवादों की जड़ बन जाते हैं। यही कानून व्यवस्था के लिए चुनौती भी बनते हैं। मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने राजस्व की धारा 24 में भूमि पैमाइश के मामलों के लिए चेक लिस्ट जारी की है।
भूमि पैमाइश प्रक्रिया को बेहतर बनाना
मंडलायुक्त ने सभी जिलों के डीएम से इसका कड़ाई से अनुपालन करने का आदेश जारी किया है। इससे राजस्व विभाग के स्टाफ से पैमाइश में अब मनमानी नहीं चलेगी। माना गया है कि पैमाइश में तमाम खामियां रहने से कई बार साधारण वाद भी अनावश्यक रूप से लंबित हो रहे हैं इससे पक्षकारों के बीच विवाद बढ़ रहा है। प्राय: कई बार ऐसी स्थिति कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन जाते हैं। कमिश्नर आन्जनेय कुमार सिंह ने इसका संज्ञान लेते हुए राजस्व की धारा 24 के वादों में पैमाइश प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की पहल की है। उन्होंने मंडल के सभी जिलों मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा और संभल के जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है। इसके साथ एक प्रारूप भेजा है जिसमें एक चेक लिस्ट है। इस आदेश का सभी पीठासीन अधिकारियों, तहसीलदार व राजस्व निरीक्षकों को अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। पीठासीन अधिकारी स्तर पर पैमाइश आख्या की जांच के लिए चेकलिस्ट का प्रयोग अहम है। राजस्व निरीक्षक के लिए मौके पर की गई पैमाइश से संबंधित माप तालिका का प्रारूप भी निर्धारित किया गया है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि पैमाइश सक्षम आदेश के आधार पर की गई है या नहीं। सभी पक्षकारों को समय से सूचना दी गई थी या नहीं और मौके पर उनकी उपस्थिति व हस्ताक्षर दर्ज हैं या नहीं। निर्देशों का पालन न होने पर जांच अधिकारी संबंधित पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
जमीन की माप में गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए
जमीन की नापजोख में उपयोग की जाने वाली जरीब का विवरण, मानक परीक्षण, प्रत्येक भुजा की माप, क्षेत्रफल का मिलान, स्थायी आधार बिंदुओं से माप शुरू करने और मौके के स्थायी चिह्नों का उल्लेख जरूरी होगा। पैमाइश आख्या पर मापकर्ता के हस्ताक्षर, पदनाम और तिथि के साथ मौके का नक्शा भी संलग्न करना होगा। आक्षा के निष्कर्ष और मानचित्र में परस्पर संगति की जांच होगी।
सिर्फ तकनीकी खामी पर वाद निरस्त नहीं होंगे
राजस्व न्यायालयों में तकनीकी खामी के आधार पर वाद निरस्त नहीं होंगे। मंडलायुक्त ने सभी डीएम को निर्देशित किया है कि सावधानी बरतें। वाद निरस्तर करने के स्थान पर वादी को पर्याप्त अवसर दिया जाए। आमतौर पर वादी को विधिक प्रक्रिया का पर्याप्त ज्ञान नहीं होता और वह अपने अधिवक्ता पर निर्भर रहता है। यदि वाद में कोई त्रुटि सामने आती है तो उसे निरस्त करने से पहले वादकारी को संशोधन का अवसर दिया जाना चाहिए। यदि तकनीकी खामी इतनी गंभीर हो कि उसे दूर करना संभव न हो, तभी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।


