
बदलाव:बेटियों की सजगता घटा रही 'हैवानियत' का अवसाद
Moradabad News - मुरादाबाद में यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं में मानसिक अवसाद के मामले कम होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बेटियाँ और महिलाएँ अब अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही हैं और अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ मुखर हो रही हैं। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
मुरादाबाद। यौन उत्पीड़न की शक्ल में होने वाली 'हैवानियत' से आहत बेटियों और कथित तौर पर पति की तरफ से घरों में हिंसात्मक गतिविधि के रूप में सामने आने वाले जुल्म से पीड़ित महिलाओं में अवसाद के मामले काफी अधिक देखे जाते रहे हैं, लेकिन अब बेटियों और महिलाओं की तरफ से अपने ऊपर होने वाले अत्याचार के विरुद्ध अधिक मुखर होने के चलते हैवानियत के नतीजे में उनमें मानसिक अवसाद की गंभीरता घटने का रुझान दिखाई देने लगा है। मनोरोग विशेषज्ञों एवं मनोविज्ञानियों के विश्लेषण में यह बात सामने आई है। कई साल से पुलिस लाइन में रेप पीड़िताओं की काउंसलिंग कर रही हूं।

अभिभावकों में अब अपनी पीड़ित बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए अधिक मुखर होने का रुझान देखने में आ रहा है। यातना का शिकार होने के बाद उनमें होने वाली मानसिक अवसाद की समस्या में कमी अब दिखाई देना शुरू हुई है। पूर्व में अभिभावक बेटी के साथ हुई घटना से जुड़े कई पहलुओं को छिपा लेते थे। जिसकी वजह से वास्तविक तौर पर इंसाफ नहीं मिल पाता था। इसके चलते आरोपी कठोर सजा से भी बच जाते थे। डॉ.बबिता गुप्ता, मनोवैज्ञानिक काउंसलर किसी के द्वारा किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से मानसिक प्रताड़ना देना भी गंभीर जुल्म है। इसके परिप्रेक्ष्य में देखें तो पति और पत्नी के बीच इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं। कुछ अरसा पूर्व तक अधिकतर मामलों में घरेलू हिंसा की शिकार सिर्फ महिलाएं ही होती थीं, लेकिन, पुरुष भी पीड़ित हो रहे हैं। महिलाओं में अपने अधिकारों को लेकर सजगता बढ़ना भी एक प्रमुख कारण के तौर पर सामने आ रहा है। डॉ.निमिष गुप्ता, मनोरोग विशेषज्ञ

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