
भोर की पहली किरण के साथ आकाश में छा गया पतगों का जाल
Moradabad News - मुरादाबाद में रक्षाबंधन पर पतंग उड़ाने का उत्सव मनाया गया। सुबह से शुरू हुई पतंग उड़ाने की गतिविधियां थोड़ी देर के लिए बारिश से बाधित हुईं, लेकिन बाद में धूप निकलने के साथ ही युवाओं के चेहरे खिल गए।...
मुरादाबाद। आ जा उड़ा ले, पहले मेरी बढ़ गई,पाकर कर ले, ये काटा वो काटा, कट गई कट गई। की गूंज के साथ जब भोर की पहली किरण उजागर हुई तक तक आकाश में पतंगों का जाल फैल चुका था। हालांकि कुछ ही देर में हवा का बहाव रुकने और फिर बारिश होने से पतंगों के शैकीनों में उदासी छा गई। छतें और मैदान भी गिले हो गए। मगर कुछ ही देर में हवा चलने और धूप खिलने से इनके चेहरे खिल गए। बस फिर किया था हर तरफ शोर और माइकों ने गूंजते रक्षाबंधन के गीतों ने पर्व के जश्न को और बढ़ा दिया।

मुरादाबाद में रक्षाबंधन पर पतंगों उड़ाने का चलन है। युवा इसके लिए कई दिन से तैयारियां कर रहे थे। शुक्रवार को तो पूरे दिन, पूरी रात और शनिवार की सायं तक पतंगों का बाजार खुला रहा। युवाओं ने तड़के से ही पतंगे उड़ाना शुरू कर दिया। कुछ देर के लिए हवा रूकी और बारिश भी आ गई तो युवाओं में निराश हुई। मगगर जल्द ही हवा के बहाव के साथ धूप निकलने से युवाओं ने राहत महसूस की। बस फिर किया था गूंजने लगीं आवाजें। आकाश में एक बार फिर छा गया पतंगों का मकड़ जाल। यह देर सायं रोशनी की आखिरी किरण तक आकाश पर कब्जा जमाए रहा। उसके बाद युवा घरों के बाहर आकर डट गएऔर तूने कितनी काटी, मैंने कितनी काटी का गणित चलता रहा।

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