
रानी लक्ष्मी बाई के आदर्श को जीवन में अपनाने का लिया संकल्प
Moradabad News - प्रेम शांति हायर सेकेंडरी स्कूल में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रधानाचार्य विजय पाल सिंह राघव ने उनके युद्ध कौशल और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के बारे में बताया। रानी का जन्म 19 नवंबर 1835 को वाराणसी में हुआ था और वे 1857 के विद्रोह की प्रमुख नायिका थीं।
बिलारी बहोरनपुर नरौली स्थित प्रेम शांति हायर सेकेंडरी स्कूल में वंदना प्रहर में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के जीवन परिचय के विषय में बताते हुए प्रधानाचार्य विजय पाल सिंह राघव कहा कि उन्हें बचपन से घुरसवारी तलवारबाजी और निशानेबाजी का बेहद शौक था ।उन्होंने अंग्रेजों से हार नहीं मानी । कार्यक्रम से पूर्व रानी लक्ष्मी बाई के चित्र पर विद्यालय की बहनों ने पुष्प अर्पित कर वीरांगना को याद किया। बुधवार को प्रधानाचार्य विजय पाल सिंह राघव ने वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1835 को वाराणसी में मणिकर्णिका के नाम से हुआ था।
1857 के विद्रोह की एक प्रमुख नायिका और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अपने नाम से ही पहचानी जाती थी ।उन्होंने बचपन से ही घुड़सवारी करना तलवारबाजी और निशानेबाजी जैसे युद्ध कौशल सीखने का बेहद शौक था। 1842 में झांसी के महाराजा गंगाधर से विभाग के पश्चात लक्ष्मीबाई के नाम से विख्यात हुई। पति की मृत्यु के बाद अंग्रेजी सरकार ने उनके दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और ग्वालियर के पास 18 जून 1858 को युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुई। प्रथम स्वाधीनता संग्राम में झांसी की रानी ने ब्रिटिश सरकार से डटकर मुकाबला किया और हार नहीं मानी ।इस अवसर पर मुख्य रूप से साधना कठेरिया, सजल राघव, रचना कश्यप ,आदित्य राघव ,आबिद हुसैन, मनोज कुमार, रंजीत ,विनीत कुमार, अमित कुमार ,शीतल, नितल ,काजल राघव, रजनी, निशा राघव,लक्ष्मी, रितिका, फातमा, निशा ,आरती, शिवानी, कामिनी ,रचना, हीरावती, खुशी, श्रद्धा ,गुडिया आदि सहित अन्य छात्राएं मौजूद रहे ।

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