Moradabad News: एसएसपी आवास की जमीन को दावा करने वाले दो सगे भाई समेत सात पर केस
Moradabad News: - फर्जीवाड़ा करके कूटरचित दस्तावेज से सालों तक अधिकारियों को गुमराह करके 28.45 लाख रुपये

Moradabad News: -फर्जीवाड़ा करके कूटरचित दस्तावेज से सालों तक अधिकारियों को गुमराह करके 28.45 लाख रुपये अवैध वसूली का भी आरोप -कमिश्नर द्वारा गठित कमेटी की जांच के बाद एसएसआई ने सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराया मुकदमा
एसएसपी आवास की जमीन पर फर्जी दावा
-1927 से ही एसएसपी का आवास बना हुआ है जो सरकारी भूमि है
मुरादाबाद, वरिष्ठ संवाददाता।
एसएसपी आवास की जमीन पर फर्जी दावा करके सालों तक किराया वसूलने के मामले में सात नामजद और अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज किया है। यह मुकदमा कमिश्नर द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसआई की ओर से सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराया गया है, जिसमें एसएसआई ने दावा किया कि कमेटी की जांच में आरोपियों के दावे की पुष्टि के लिए नगर निगम और पुलिस से कोई रिकार्ड नहीं मिले हैं। राजस्व रिकार्ड में एसएसपी आवास की जमीन सरकारी पाई गई है। आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उक्त जमीन को अपना बताकर सालों तक किराया भी वसूला है।
नामजद आरोपियों के खिलाफ केस
सिविल लाइंस थाने के एसएसआई हरेंद्र सिंह की ओर से सिविल लाइंस थाने में कोतवाली के मंडी चौक बल्लभ मोहल्ला निवासी सुधीर कुमार धवन, उनके भाई सुनील कुमार धवन, सुमित धवन और उनके भाई अंकित धवन, सुधा टंडन, विपिन कुमार और दिल्ली के शालीमारबाग निवासी बीना तलवार और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया है। इसके लिए हरेंद्र सिंह ने एसएसपी को पत्र दिया था, जिसमें बताया कि एसएसपी आवास के भूमि का स्वामित्व तय करने के लिए कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने एडीएमं प्रशासन के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। इस समिति में नगर निगम के उपनगर आयुक्त द्वितीय, एसडीएम सदर एवं अपर आयुक्त प्रशासन शामिल थे। एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार एसएसपी का आवासीय भवन राजस्व अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या-455अ ग्राम छावनी तहसील सदर पर अंग्रेजी शासन काल से बना हुआ है। इस गाटा की 15.30 एकड़ जमीन आबादी कोठी के रूप में दर्ज है। इसी आधार पर एसपी की कोठी पहले से निर्मित है। नगर निगम के कार्यालय में कर निर्धारण संबंधी अभिलेखों में दर्ज नाम तहसील के अभिलेखों से मेल नहीं खाते हैं। नगर निगम की ओर से यह प्रमाण नहीं मिल पाया है कि कर निर्धारण संबंधी कागजातों में हरगुलाल का नाम किस आधार पर कब और कैसे दर्ज हुआ था। इस मामले में कोई पत्रावली नगर निगम कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा सुधीर कुमार धवन और उनके सहयोगी द्वारा कोर्ट में लंबित केस में तथाकथित रूप से तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (ई) विशेष शाखा, अभिसूचना विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ कमल सक्सेना के द्वारा लिखा हुआ तीन अगस्त 2002 के पत्र को लगाया है। अगस्त 2024 में इसका सत्यापन कराया गया तो पुलिस अधीक्षक अधिष्ठान अभिसूचना मुख्यालय ने 30 अगस्त 2024 को रिपोर्ट दी, जिसमें बताया गया कि काफी तलाशने के बाद जो पत्र संख्या बताया है वह कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाया गया। इससे सुधीर कुमार धवन का पत्र प्रमाणित नहीं हो सका। प्रथम दृष्टया यह पत्र कूटरचित है। नगर निगम कार्यालय के कर निर्धारण रिकार्ड में भी ऐसा कोई प्रमाणित अभिलेख नहीं मिला है।
दस्तावेजों का कूटरचना
आरोपियों ने मिलकर तैयार किये कूटरचित दस्तावेज: एसएसआई
एसएसआई हरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सुधीर कुमार धवन और सुनील कुमार धवन ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर स्वयं को हरगुलाल का वंशज बताते हुए 190 का एक बैनामा प्रस्तुत किया। उसका अवलोकन किया गया तो उसमें विक्रेता अहमदी बेगम द्वारा कहीं नहीं बताया है कि उनके पास उक्त संपत्ति कहां से आई थी। बैनामे में गाटा के चौहद्दी का भी सही उल्लेख नहीं था। जिससे स्पष्ट है कि बैनामा संदिग्ध हैं और यह सुधीर कुमार धवन आदि के स्वामित्व को सिद्ध नहीं करता है। जबकि इस जमीन पर साल 1927 से ही एसएसपी का आवास बना हुआ है जो सरकारी भूमि है। आरोप लगाया कि आरोपियों ने मिलकर साजिश करके एसएसपी आवास की जमीन से संबंधित फर्जी और कूटरचित दस्ततावेज तैयार किए। इसके आधार पर खुद को जमीन का स्वामी होना बताया।
गुमराह करके आरोपी लेते रहे किराया
अवैध वसूली के मामले
इतना ही नहीं कोर्ट और प्रशासनिक अधिकारियों को गुमराह करके आरोपी किराया भी लेते रहे। आरोपियों ने वर्ष 2024 तक पुलिस विभाग से 28 लाख 45 हजार 117 रुपये अवैध रूप से किराया के नाम पर वसूल कर आपस में बांट लिया। आवास एवं विकास परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ से फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को गाटा संख्या-455 का स्वामी बताते हुए मुआवजा प्राप्त किया है। साथ ही सरकारी भूमि के कूटरचित बैयनामे कर दिए हैं।
वर्जन
जांच की स्थिति
कमिश्नर द्वारा गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद एसएसआई सिविल लाइंस की ओर से सात नामजद और अज्ञात पर केस दर्ज कराया गया है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा उसके अनुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
-कुमार रणविजय सिंह, एसपी सिटी।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


