
संसार के सभी दुखों का कारण बार बार जन्म लेना
Moradabad News - वेद प्रचार मंडल का चार दिवसीय सामवेद परायण यज्ञ एवं वार्षिकोत्सव गुलजारीमल धर्मशाला में शुरू हुआ। आचार्य सोमदेव शास्त्री और रमेश सिंह आर्य ने यज्ञ कराया। सोमदेव शास्त्री ने सामवेद और न्याय दर्शन के...
वेद प्रचार मंडल का चार दिवसीय सामवेद परायण यज्ञ एवं वार्षिकोत्सव गुलजारीमल धर्मशाला में आरंभ हुआ। आचार्य सोमदेव शास्त्री एवं रमेश सिंह आर्य ने यज्ञ कराया। अमृता आर्य ने भजनों की प्रस्तुति की। सोमदेव शास्त्री ने सामवेद और न्याय दर्शन के मंत्रों की व्याख्या की। उन्होंने बताया संसार में जितने भी दुख होते हैं उनका मूल बार बार जन्म लेना होता है। उन्होंने बताया न्याय दर्शन में महर्षि गौतम ऋषि ने दुख के 5, महर्षि पंतजलि ने 4, कपिल मुनि ने 3 और महर्षि मनु के दुख के 1 प्रकार बताए हैं। न्याय दर्शन के अनुसार गर्भ अवस्था का दुख जीव को अत्यंत पीड़ा देता है।

वहीं परिणाम दुख, ताप दुख, संसकार दुख भी जीव को पीड़ाएं देते और दुख देते हैं। अरविंद आर्य बंधु, मयंक आर्य, आचार्य भूपेंद्र शास्त्री, लाल किशोर शास्त्री, प्रभा सैनी, लाकेश आए, मनोज रस्तोगी, वीरेंद्र आर्य, पूनम शास्त्री, आशा जैमिनी, सुनीता गुप्ता, कुसुम आर्य, आशा यादव्, भारती रस्तोगी, ऋषि पाल सिंह यादव, मथुरा प्रसाद, गायत्री देवी, हरवीर सिंह आदि शमिल रहे।

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