भारत का शैक्षिक इतिहास रहा काफी समृद्ध
Moradabad News - मुरादाबाद के बीटेक छात्र अश्वनी कांत सारस्वत ने राष्ट्रीय सेमिनार में ‘भारत 2047 के विकास लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत की शैक्षिक धरोहर को संजोने में प्रौद्योगिकी की भूमिका’ पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रौद्योगिकी पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच एक सेतु का कार्य कर सकती है।

मुरादाबाद। बीटेक (सीएस) फाइनल ईयर के छात्र अश्वनी कांत सारस्वत ने आईसीएसएसएसआर की ओर से प्रायोजित राष्ट्रीय सेमिनार में ‘भारत 2047 के विकास लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत की शैक्षिक धरोहर को संजोने में प्रौद्योगिकी की भूमिका’ विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया। अश्वनी कांत ने कहा कि भारत का शैक्षिक इतिहास बहुत समृद्ध रहा है। इसमें गुरुकुल, नालंदा और तक्षशिला जैसी प्राचीन धरोहरों के साथ विज्ञान, गणित, चिकित्सा और दर्शन में पारंपरिक ज्ञान भी सम्मिलित था। आज के डिजिटल युग में इन धरोहरों का अधिकांश भाग या तो भुला दिया गया है या युवाओं के लिए इसे पहुंचाना कठिन हो गया है।
परिणामस्वरूप पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच एक अंतर (खाई) पैदा हो गई है। आधुनिक प्रौद्योगिकी को पारंपरिक शिक्षा के साथ मिलाकर एक संतुलित और समावेशी शिक्षण प्रणाली बनाई जा सकती है। डिजिटल उपकरणों का उपयोग प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करने में मदद कर सकता है। शोध-पत्र का निष्कर्ष यह निकला कि प्रौद्योगिकी भारत के अतीत और भविष्य के बीच एक सेतु के रूप में कार्य कर सकती है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए एक अमूल्य धरोहर बन जाएगी। इसका प्रभावी उपयोग भारत के विकास लक्ष्य 2047 को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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