कर्बला हक और बातिल के संघर्ष की अजीम मिसाल: मौलाना अहसान
नगर के मोहल्ला नूरउल्लाह स्थित सिद्दीके अकबर मस्जिद में सालाना दस रोज़ा पैगाम-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। हजरत इमाम हुसैन की सीरत पर चर्चा हुई। मौलाना अहसान अत्तारी ने उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उलेमा ने कर्बला के वाकये को इंसानियत और सब्र का प्रतीक बताया। अंत में दुआ का आयोजन किया गया।

नगर के मोहल्ला नूरउल्लाह स्थित सिद्दीके अकबर मस्जिद में गुलामाने सिद्दीके अकबर की तरफ से आयोजित सालाना दस रोज़ा पैगाम-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस की नवीं शब में गुरुवार को उलेमा-ए-अहले सुन्नत ने हजरत इमाम हुसैन की सीरत और कर्बला के संदेश पर रोशनी डाली। कॉन्फ्रेंस का आगाज मौलाना गय्यूर अहमद आफाकी ने कुरआन पाक की तिलावत से किया, जबकि गुलाम नबी अत्तारी ने हम्द व नात तथा इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश किया। मुख्य वक्ता मुबल्लिग-ए-दावत-ए-इस्लामी इंडिया मौलाना अहसान अत्तारी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में हर हाल में शरियत की पाबंदी का बेहतरीन नमूना पेश किया।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने दीन-ए-इस्लाम की सरबलंदी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी लेकिन हक और सच्चाई के रास्ते से पीछे नहीं हटे। उलेमा ने कहा कि कर्बला का वाकया इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और दीन की हिफाजत का पैगाम देता है। आखिर में सलातो-सलाम के बाद मुल्क व मिल्लत की खुशहाली, अमन और तरक्की के लिए दुआ कराई गई। कॉन्फ्रेंस की सरपरस्ती अनीसुर्रहमान अज़हरी ने की तथा सदारत मौलाना गय्यूर अहमद आफाकी ने की। इस मौके पर हाफिज फैजान, हाफिज तहजीब, मुफ्ती सुब्हान रजा, मुफ्ती मोहम्मद बिलाल रजा, मौलाना दानिश रजा, अबरार हुसैन अत्तारी, अरकान कादरी, हाजी नसीम, इंतजार रजवी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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