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वैदिक मंत्रोचारण के साथ गोवर्धन नाथ मेला का हुआ आगाज

वैदिक मंत्रोचारण के साथ गोवर्धन नाथ मेला का हुआ आगाज

संक्षेप: Mohoba News - ऐतिहासिक गोवर्धन नाथ जू मेला की शुरुआत विधि विधान के साथ हुई। यह मेला एक माह तक चलेगा जिसमें सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने इसे नगर का गौरव बताया। मेला में...

Thu, 23 Oct 2025 11:12 PMNewswrap हिन्दुस्तान, महोबा
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चरखारी, संवाददाता। ऐतिहासिक गोवर्धन नाथ जू मेला का आगाज हो गया है। विधि विधान से पूजन अर्चना के साथ मेला की शुरुआत कराई गई। एक माह तक मेला में सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगें। एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि ऐतिहासिक मेला नगर का गौरव है। ऐतिहासिक गोवर्धन मेला की शुरुआत पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर और भाजपा जिलाध्यक्ष मोहन सिंह कुशवाहा ने हवन पूजन में हिस्सा लिया। 142 साल पुराने मेला की शुरुआत पर भगवान गोवर्धन नाथ की सवारी मेला पहुंची। कार्तिक मास में यह मेला लगता है। जिसमें जिले सहित बांदा,हमीरपुर, चित्रकूट, छतरपुर आदि से लोग मेला देखने के लिए पहुंचतें है।

सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ जू मेला की शुरुआत रियासत काल में सर मलखान सिंह जूदेव ने 1883 में कराई थी। मेला में 108 देव मंदिरों के मध्य में भगवान श्री गोवर्धन नाथ का मंदिर है जिसमें भगवान गोवर्धन पहाड़ को उंगली पर उठाए हुए है। नगर पालिका के द्वारा मेला के लिए 32 लाख का बजट स्वीकृत किया गया है। मेला में धार्मिक कार्यक्रमों में रामलीला, कृष्ण लीला का आयोजन होगा जबकि कवि सम्मेलन, बूगी बूगी, मुशायरा सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन कराया जाएगा। खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित कराई जानी है। चेयरमैन नगर पालिका मंजू कुशवाहा का कहना है कि मेला को भव्य बनाने का प्रयास किया गया है। मेला में आयोजित कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को भी मौका मिलेगा। राजकीय मेला के दर्जा का मामला अधर में लटका चरखारी। सहस्त्र श्री गोवर्धन नाथ जू मेला को राजकीय मेला के दर्जा की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेला को राजकीय मेला का दर्जा देने का ऐलान किया तो मेला की भव्यता को चार चांद लगने की उम्मीद दिखने लगी मगर बाद में मेला को राजकीय मेला के दर्जा का मामला अधर में लटक गया। नगर के बुद्धिजीवियों का कहना है कि मेला के इतिहास को देखते हुए राजकीय मेला का दर्जा दिया जाना चाहिए।