मंगलगढ़ दुर्ग पर्यटन विकास में मील का पत्थर होगा साबित
Mohoba News - तीस साल से सेना के कब्जा में था मंगलगढ़ दुर्ग बुंदेलखंड के कश्मीर के नाम से विख्यात है चरखारी

महोबा, संवाददाता। रियासत कालीन विरासतें गौरवशाली इतिहास की गवाह बनी हुई है। कई प्राचीन विरासतें देखरेख के अभाव में बदहाली पर आंसू बहा रहीं है। लंबे समय से इन विरासतों के संरक्षण की मांग उठाई जा रही है। चरखारी रियासत के मंगलगढ़ दुर्ग में पर्यटन की असीम संभावनाएं है। लंबे समय तक यह विरासत सेना के कब्जे में रहा है अब सेना के अधिकार से अलग होने पर लोग पर्यटन विकास को लेकर किला को तैयार कराने की मांग उठा रहे है। चरखारी को बुंदेलखंड के कश्मीर के नाम से जाना जाता है। रियासत काल में यहां के राजाओं ने कई ऐतिहासिक विरासतों का निर्माण कराया।
राधा कृष्ण के मंदिरों के साथ यहां का मंगलगढ़ दुर्ग वैभवशाली इतिहास का गवाह है। पिछले तीस साल से यह किला सेना के कब्जे में था। स्थानीय लोगों की मांग पर जनप्रतिनिधियों के द्वारा शासन स्तर पर किला को पर्यटन विकास के लिए खोले जाने की मांग उठाई तो पिछले दिनों सेना के कब्जे से मुक्त हो गया। मगर यह प्राचीन विरासत जीर्णशीर्ण हो गई है। स्थानीय लोगों ने इसे पर्यटन विकास से जोड़ने के लिए इसके कायाकल्प कराने की मांग उठाई है। इतिहासकारों का कहना है कि 16 वीं शताब्दी में महाराजा छत्रसाल के पुत्र महाराज जगतराज ने मंगलगढ़ का निर्माण कराया था। यह किला अभेद माना जाता है। एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर का कहना है कि मंगलगढ़ चरखारी में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा। शासन स्तर पर लगातार इस प्राचीन विरासत के संरक्षण की मांग उठाई जा रही है। किला की मरम्मत और सुंदरीकरण का काम होने के बाद यहां दूर दूर से पर्यटक किला का दीदार करने के लिए पहुंचेगें। जिससे चरखारी को पर्यटन क्षेत्र में एक नयी पहचान मिलेगी।तीस साल से सेना के कब्जा में था मंगलगढ़ दुर्गबुंदेलखंड के कश्मीर के नाम से विख्यात है चरखारीफोटो 18 एमएचओ 3परिचय- चरखारी का ऐतिहासिक मंगलगढ़ किला।
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