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.... गोखारगिरि में सब देवता बिराजे, पैकरमा से न चूको

.... गोखारगिरि में सब देवता बिराजे, पैकरमा से न चूको

गुरू गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वाधान में शनिवार को कार्तिक मास की पूर्णिमा पर श्रद्धा, भक्ति व रामधुन के साथ परिक्रमा संपन्न हुई। जिसमें भक्तों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। परिक्रमा के दौरान महिलाएं भई न ब्रज की मोर व लगत प्यारे रामा चित्रकूट निज धामा आदि कार्तिक गीत गाते हुए साथ-साथ चल रही थी।

परिक्रमा शिवताण्डव मंदिर से शुरू होकर पठवा के बाल हनुमान, रामजानकी मंदिर, संत कबीर आश्रम, बाबा फिरोज शाह की दरगाह, कालीमाता मंदिर, छोटी च्द्रिरका मंदिर, पुलिस लाइन, नागौरिया मंदिर, कालभैरव मंदिर आदि स्थानों से होते हुए वापस शिवताण्डव में समाप्त हुई। इसके बाद प्रांगण में हवन-पूजन, कीर्तन व सत्संग का आयोजन हुआ। जिसमें डीएम रामविशाल मिश्रा ने कार्तिक पूर्णिमा के बारे में बताते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष में 12 पूर्णिमा होती है। जब अधिक मास या मलमास आता है तो इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से जाना जाता है। आज के दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक असुर का अंत किया था। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से विशेष फल प्राप्त होता है। प्रवक्ता डॉ एलसी अनुरागी ने लागे गोरखगिरि नीको, गोरखगिरि में सब देवता विराजे, पैकरमा करें से न चूको की प्रस्तुति दी। परिक्रमा विकास हेतु आयोजित गोष्ठी में सभी ने अपने विचार रखे। इस मौके पर दाऊ तिवारी, फौजी आशीष द्विवेदी, प्रमोद पालीवाल, सीताराम, अरविन्द सिंह कछवाह, हरी द्विवेदी, एमपी भदौरिया, प्रमोद सक्सेना, स्वतंत्र सक्सेना, रामराजा, आशीष पुरवार, प्रभात सुल्लेरे, सौरभ तिवारी, हरप्रसाद अनुरागी, कंचन तिवारी, मोनिका तिवारी, सुनैना शुक्ला, बबली यादव, रामजी गुप्ता, बलवीर वैश्य आदि रहे।

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