यूपी के अनोखे पान वाले चाचा, दुकान में पाठशाला चलाते हैं मोहम्मद मियां
आम तौर पर पान की दुकानों का ज़िक्र आते ही तंबाकू और सिगरेट से भरी एक आम दुकान की तस्वीर सामने आती है, लेकिन बरेली के फूटा दरवाजा इलाके में एक पान की दुकान बच्चों की जिंदगी बदलने का माध्यम बन गई है। यहां के ‘पान वाले चाचा’ आरिफ अहमद अपनी छोटी-सी दुकान को बच्चों की मुफ्त पाठशाला में बदल चुके हैं।

आम तौर पर पान की दुकानों का नाम लेते ही आंखों के सामने तंबाकू और सिगरेट से भरी दुकान की तस्वीर उभरती है, लेकिन बरेली के फूटा दरवाजा में एक पान की दुकान बच्चों की जिंदगी संवारने का काम कर रही है। यहां बैठने वाले आरिफ अहमद, जिन्हें मोहल्ले के बच्चे प्यार से ‘पान वाले चाचा’ कहते हैं, अपनी दुकान को पढ़ने-लिखने के अड्डे में बदल चुके हैं। छोटे-छोटे बच्चे जब कॉपियां और चार्ट लेकर आते हैं, तो आरिफ न सिर्फ मुस्कुराकर उनका स्वागत करते हैं, बल्कि मुफ्त में नक्शे, डायग्राम और ड्राइंग बनाकर उनकी पढ़ाई आसान कर देते हैं। जिस जगह से आमतौर पर नशे का सामान बिकता है, वहां बच्चों का भविष्य संवरता देखना अपने आप में एक अनोखी मिसाल है।
बरेली में पुराने शहर के फूटा दरवाजा इलाके में आरिफ अहमद की छोटी-सी दुकान दिनभर बच्चों की आवाजाही से गुलजार रहती है। कोई बच्चा भूगोल का नक्शा बनवाने आता है, कोई विज्ञान का डायग्राम तो कोई क्राफ्ट या चार्ट बनाने में मदद मांगता है। खास बात यह है कि आरिफ इन सभी कामों के लिए कभी पैसे नहीं लेते। बच्चों की कॉपियों में ड्राइंग, चार्ट्स पर जरूरी चित्रांकन और प्रोजेक्ट में लगने वाले नक्शे, सब कुछ वे अपने हाथों से बनाकर तैयार कर देते हैं।
आरिफ के इस अनोखे काम की चर्चा पूरे मोहल्ले में है। लोग कहते हैं कि जहां बाकी पान की दुकानों पर नशे से जुड़ा सामान बिकता है, वहीं इस दुकान से बच्चों का भविष्य संवरता है। बच्चों के लिए यह दुकान किसी लाइब्रेरी से कम नहीं। यहां उन्हें न सिर्फ पढ़ाई में मदद मिलती है, बल्कि प्रोत्साहन भी मिलता है कि वे बिना झिझक कभी भी अपने सवाल लेकर आ सकते हैं। मोहल्ले के छोटे-छोटे बच्चे बताते हैं कि चाचा कभी किसी को मना नहीं करते। चाहे रात हो या व्यस्त समय, वे हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं। बच्चे बड़े प्यार से कहते हैं, ‘चाचा से अच्छा कोई ड्राइंग नहीं बना सकता।’ चाचा के इस व्यवहार ने उन्हें बच्चों के बीच एक आदर्श व्यक्तित्व बना दिया है।
बच्चों की मदद के लिए हर समय तैयार रहते हैं आरिफ
आरिफ अहमद बताते हैं कि वे खुद अधिक पढ़ाई नहीं कर पाए, लेकिन हमेशा चाहा कि मोहल्ले के बच्चे खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। आरिफ का कहना है कि यदि उनकी छोटी-सी मदद से किसी बच्चे का होमवर्क सही हो जाए या प्रोजेक्ट में अच्छे नंबर मिल जाएं, तो यही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है। उनके अनुसार, शिक्षा इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है और बच्चों के सीखने में सहायता करना उनका फर्ज भी है और खुशी भी।
पान की दुकान पर टंगे हैं, पढ़ाई से संबंधित सामान
आरिफ की दुकान पर पान का सामान अब प्रमुख नहीं रह गया है। दुकान की दीवारों पर बच्चों के बनाए चार्ट्स टंगे हैं, ड्राइंग की पेंसिलें और स्केल रखे हैं, और काउंटर पर कॉपी-किताब रखने के लिए हमेशा जगह खाली रहती है। यह दुकान न सिर्फ पान की बिक्री का ठिकाना है, बल्कि बच्चों का भविष्य संवारे जाने वाली एक छोटी-सी पाठशाला बन चुकी है।

लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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