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फोटो : रामचरित मानस आराधना का मध्यम मार्ग : मोरारी बापू

रामकथा वाचक संत मोरारी बापू ने कहा कि रामचरित मानस आराधना का मध्यम मार्ग है। इसमें मां के सभी स्वरूपों का समावेश है। मानस पूर्णावतार है। इसमें सोलह कलाओं का संगम है। वह कालीखोह स्थित श्रीदेवी मानस पाठ के सांतवें दिन भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे। संत मोरारी बापू ने कहा कि मानस शैलपुत्री और महागौरी भी है। जैसे मां का स्वरूप सौम्य है उसी तरह मानस का भी सौम्य है और भगवान राम तो दुश्मनों की दुश्मनी भी भूल जाते है। वे अपने प्रति किए गए अपराध को भी भूल कर स्नेह करने वाले व्यक्ति को गले लगाते है। यदि दक्षिणमार्ग वैराग्य का हो तो वाम मार्ग भक्ति का हो। मानस में तो तीसरा मार्ग राम का है। दक्षिणमार्ग में साधक सफेद वस्त्र धारण कर सफेद फूल व नैवेद्य से पूजा करता है। वाममार्ग में साधक पंचमकार विधि से पूजा करता है। वाममार्ग में साधक मद्य, मांस, मीन, मैथुन व मुद्रा विधि से पूजा करता है। मानस में भी पंच मकार विधि से पूजा का उल्लेख है पर इससे इतर है। साधना में मद्य की आहूति देनी है तो श्रीरामनाम का जप करो। भक्त उसी तरह भगवान राम के लिए परेशान रहता है जैसे मछली पानी के बगैर परेशान हो जाती है। कहा कि मानस में मैथुन नहीं मंथन का उल्लेख है। यदि साधना करनी है तो मंथन करो। मुद्रा तो आवश्यक ही है। मुद्रा साधना करने वाली होनी चाहिए। बलि देना है तो अहं की बलि दे। जिसका जो स्वभाव हो उसे वहीं दीजिए। मां का स्वरूप ममता का है। प्रभु के पथ पर चलो। यही सिद्धि का मार्ग है। सिद्धि के लिए बलि की जरूरत नहीं है। मानस में भी लिखा है बलि पूजा चाहत नहीं चाहत है एक प्रति। किसी भी साधना के लिए पूजा या बलि नहीं बल्कि प्रेम की जरूरत है। जहां संसय समझ में आए वहां उसका समाधान करो। क्रोध की अग्नि में संसय को मत जलाओं बल्कि क्षमा की अग्नि में संसय को जलाओ। भगवान राम तो यहीं चाहते है। यहां तो शास्त्रों में भी उल्लेख है कि सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामय----। यहां तो सभी के कल्याण की कामना की गयी है। वह चाहे मानव हो, पशु हो या पेड़-पौधे, पक्षी ही क्यों न हो। फिर हम किसी के प्रति हिंसा क्यों करें। प्रतीकात्मक हिंसा भी नहीं होनी चाहिए। जायफर या नीबू की बलि दी जाए या फिर किसी और की बलि दे। कथा के समापन पर व्यास पीठ की आरती की गयी। नगर विधायक रत्नाकर मिश्र, आशीष बुधिया मौजूद रहे। आधार से भी बड़ा है मानस कार्ड विंध्याचल। राम कथावाचक संत मोरारी बापू ने कहा कि देश के लोगों को आधार कार्ड से भी जरूरी मानस कार्ड है। मानस का ज्ञान तो प्रत्येक व्यक्ति को होना चाहिए। इन दिनों जिस तरह पहचान के लिए आधार कार्ड जरूरी है उसी तरह आध्यात्मिक ज्ञान के लिए तो मानस का ज्ञान आवश्यक है। मानस में सभी समाज का उल्लेख है। इसमें नियम, संयम का भी उल्लेख है। फिर इसे क्यों नहीं आधार कार्ड माना जा सकता है। हमारे विचार से तो यह विश्व का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। इसे कोई माने या न माने यह उसकी सोच है, पर हमारी सोच तो मानस को लेकर एकदम स्पष्ट है। मानस पढ़ने का समय यदि किसी को नहीं मिल रहा है तो वह कम से कम घर में एक गुटका तो रख सकता है। फेसबुक और वाट्सअप से बच्चों को दूर रखें विंध्याचल। संत मोरारी बापू ने मोबाइल फोन, फेसबुक और वाट्सअप से बच्चों को दूर रखने की सलाह दी। कहा परिवार का मुखिया फेसबुक और वाट्सअप देखने के लिए एक समय तय कर ले और कुछ समय ईश्वर की आराधना के लिए निकाले। इससे वह तनावमुक्त हो जाएगा। कहा कि कैसा समय आ गया है जबकि चार वर्ष की उम्र के बच्चे जवान लगने लगे हैं। इससे बच्चों को बचाओ। तरक्की जरूरी है पर विश्राम सबसे जरूरी है। संत मोरारी बापू ने यह टिप्पणी पंडाल में मौजूद कुछ लोगों के वाट्सअप में व्यस्त होने पर की। कहा कि रामकथा को खेल मत समझो। यह अहोभाग्य है कि रामकथा तुम तक चल कर आ गयी है वर्ना आदि काल में तो ऋषि-मुनि इसे सुनने के लिए व्याकुल रहते थे। रामकथा पर कोई जीएसटी नहीं विंध्याचल। संत मोरारी बापू ने रामकथा के दौरान जीएसटी पर चुटकी ली। कहा कि रामकथा सुनने पर कोई जीएसटी नहीं देनी होगी। इससे घाटा नहीं होगा बल्कि इसमें सिर्फ लाभ है। व्यक्ति केवल अपने हित की बात करता है जबकि रामकथा सबके हित की बात करती है। उन्होने जीएसटी की आध्यात्मिक व्याख्या भी की। कहा कि जी का अर्थ गुरु, एस का अर्थ संत और टी का अर्थ त्रिलोक यानि भगवान शिव है। इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है।

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  • Web Title:the ramcharitra is the medium for prayer