जलाई गई होलिका, कल होगी रंगों की बारिश

Mar 03, 2026 12:31 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मिर्जापुर
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Mirzapur News - मिर्जापुर में होलिका दहन मंगलवार भोर में किया गया। जिलेभर में लगभग 2400 स्थानों पर होलिका जलाई गई। लोग अबीर-गुलाल के साथ होली की शुभकामनाएं देने लगे। चंद्रग्रहण के कारण रंगों की होली बुधवार को खेली जाएगी। यह पर्व भक्त प्रहलाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

जलाई गई होलिका, कल होगी रंगों की बारिश

मिर्जापुर। बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य के विजय की प्रतीक होलिका का दहन मंगलवार भोर में कर दिया गया। जिलेभर में लगभग 2400 स्थानों पर होलिका दहन किया गया। नगर से लेकर गांव में होलिका जलाने के बाद ढोल और मजीरे की थाप पर होली, फाग का गायन किया गया। सर..र..र ..के बोल चहुंओर गूजंने लगे। होलिका दहन के बाद एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाने में लोग जुट गए। वहीं, होली की बधाई देने का सिलसिला भी शुरू हो गया। हालांकि, मंगलवार को चंद्रग्रहण के सूतक काल के कारण रंगों की होली बुधवार को खोली जाएगी। इससे पहले गांव और मोहल्ल के बच्चों ने परंपरा के अनुसार कहीं बसंत पंचती तो कहीं रंभरी एकादशी पर होलिका गाड़ा गया।

इसके बाद से प्रतिदिन झाड़-झंखाड़, पेड़ की डालियां, उपली आदि से होलिका का बढ़ाया गया था। साथ ही भक्त प्रहलाद एवं होलिका (प्रहलाद की बुआ) की मूर्ति भी प्रतीक स्वरूप रखा गया। शाम को प्रदोष काल, भद्रा के दाथ्रान होलिका का दहन किया गया। होलिका में आग लगते ही लोगों ने खुशी का इजहार करते हुए एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। यही नहीं होलिका दहन से पहले लोगों ने अपने-अपने घरों से उपली आदि ले जाकर होलिका में समर्पित किया। साथ ही धधकती होलिका की अग्नि बर्रे, गेहूं, जौ, तिसी आदि के पौधों का होला झुलसाकर लोग घर ले गए। मान्यता है कि इससे वर्ष घर में सुरक्षित रखने से सुख और समृद्धि का वास होता है। भारतीय संस्कृत एवं परंपरा में रचा-बसा होली का त्योहार भक्त प्रहलाद और होलिका से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षस राज हिरण्यकश्यप के भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद की भक्ति और अश्वास का अटूट कहानी है। हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका की गोद में बैठाकर आग लगा दिया था, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद को सुरक्षित कर लेते हैं और होलिका धू-धू कर जल उठती हैं। यानि बुराई की प्रतीक होलिका पवित्र अग्नि में जलकर भष्म हो जाती हैं और भक्त प्रहलाद सुरक्षित बाहर निकल आते हैं। कल खेली जाएगी रंगों की होली होली के त्योहार के इतिहास में संभवत: पहली बार ऐसा हो रहा है कि होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली की बजाय एक दिन बाद रंगों रंगों की होली खेली जाएगी। मंगलवार को चंद्रग्रहण के कारण ऐसा किया गया है। पंडित डा. रामलाल त्रिपाठी ने बताया कि मंगलवार को दोपहर बाद 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्रहण रहेगा, लेकिन सूतक काल सुबह 6:20 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा। लिहाजा पूरे दिन होली नहीं खेला जा सकता है। हालांकि बच्चों के लिए होली खेलने की मनाही नहीं है, लेकिन बड़ों की होली पूर्णत: प्रतिबंधित माना गया है। बुधवार को लोग पूरे दिन भंग का रंग जमा कर पूरे दिन होली का उत्सव मनाएंगे। सुबह से बाबा की बूटी यानि भांग और ठंडई की मस्ती में युवक-युवती, बुढ़े जवान सब रंग भर मस्ती करेंगे। दोपहर बाद नये वस्त्र पहल कर अपने रिश्तेदार, मित्र, शुभचिंतकों के घर पर अबीर-गुलाल लगा कर एक-दूसरे को होली शुभकामनाएं देंगे और गुझिया की मिठास संग मेहमानों की खातिरदारी करेंगे।

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