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किसानों ने शुरू किया नहर पाटो अभियान

किसानों ने शरू किया नहर पाटो अभियान

नहरों मे पानी नहीं छोड़े जाने को लेकर छानबे के किसानों ने आन्दोलन की राह पकड़ ली है। बुधवार की उमापुर - गोड़सर नहर की तली सफाई करने के बाद तटबंध पाटकर किसानों ने नहर पाटो अभियान शुरू कर दिया। कसधना ग्राम के सामने सुबह से ही किसानों का जमावड़ा लगने लगा। हाथ मे फावड़ा लेकर डटे किसानों ने नहर पाटो अभियान शुरू कर दिया। नहर की तली में उगे झाड़ - झंखाड़ साफ करने के बाद तटबंध की मिट्टी को समतल सपाट कर दिया। किसानों का नेतृत्व कर रहे दीपक पाण्डेय ने बताया कि अब तक प्रकृति के सहारे लहलहा रही फसलों की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। बीते छह माह से नहर मे पानी नहीं छोड़ा गया। नरोइयां, गंगापुर, कसधना, बदेवरा, भतड़ा, जिगना, रघईपुर, बिखरा, सिन्धुरिया ग्रामों मे नहर की तली मे लता बेर व अन्य कंटीले पौधों की भरमार है। वहीं टेल पर बसे गोड़सर सरपत्ती ग्राम मे नहर का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। लघु डाल नहर प्रखण्ड अन्तर्गत संचालित कमोबेश 12 किलोमीटर लम्बी नहर का कार्यालय इलाहाबाद जिले मे है। जबकि तीन - चौथाई हिस्सा छानबे क्षेत्र मे पड़ता है। नतीजतन यहां के किसानों की गुहार अनसुनी कर दी जाती है। किसानों का कहना है कि बीते डेढ़ दशक से नहर की तली सफाई व्यवस्था तटबंध मरम्मत के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाए गए। पूर्वी छोर पर स्थित चेहरा, पाली,रसौली, बजटा ग्राम की सीमा में ही पानी का प्रवाह दम तोड़ देता है। सिंचाई के लिए पानी के अभाव में फसलें सूख जाती हैं। फिर भी पनिकर की वसूली की जाती है। कार्यदायी संस्था के अधिकारी कभी नजर ही नहीं आते।ऐसी परिस्थिति मे अरसे से यह नहर फसलों की सेहत के लिए नासूर साबित हो रही है। नहर पाटो अभियान मे  रमा शंकर उर्फ मुखिया चौबे,राजेश पाण्डेय, अलाउद्दीन, छबीले, जोधन वर्मा, रवीकांत, अनूप, सोनू, आलोक रहे।

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  • Web Title:Farmers started the Canal Pato campaign