भगवान राम की बाल लीलाओं में मर्यादा और आदर्श का गहरा संदेश
Mirzapur News - जमालपुर के पसही गांव में काली माता मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा की तृतीय निशा में कथा व्यास पं. नीरजानन्द शास्त्री जी ने भगवान श्रीराम की बाल लीला, नगर दर्शन और अन्य कहानियों का वर्णन किया। कथा में भक्तों को भक्ति रस में डुबो दिया गया और श्रीराम के आदर्शों का गहरा संदेश प्रस्तुत किया गया।

जमालपुर। क्षेत्र के पसही गांव स्थित काली माता मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा की तृतीय निशा पर कथा व्यास मानस किंकर पं. नीरजानन्द शास्त्री जी महाराज भगवान के बाल लीला, स्वरूप, नगर दर्शन और फुलवारी कि कथा सुनाकर भक्तों को भक्ति रस में सरावोर कर दिया। उन्होंने बताया कि श्रीराम की बाल लीला अत्यंत मनमोहक और प्रेमपूर्ण है, जिसमें मर्यादाओं और आदर्शों का गहरा संदेश छिपा है। भगवान का मां कौशल्या से बाल हठ और गुरु आश्रम में विनम्रता का सुंदर संतुलन है। माताओं के साथ मंद-मंद मुस्कुराते हुए नटखट क्रीड़ाएं करते थे। कभी-कभी दो राम हो जाते, तो मां असमंजस मे पड़ जातीं।
तब भगवान ने कौशल्या माता को अपना विराट रूप दिखाया। आश्रम संस्कार के साथ धीरे-धीरे भाइयों के साथ बड़े होने पर अयोध्यावासियों को बहुत सुख दिया। एक दिन अयोध्या में महर्षि विश्वामित्र का आगमन हुआ और यज्ञ की रक्षा के लिए उनके साथ वन में गए। जहां ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे महाबली राक्षसों को मारकर मुनियों के तपस्या को नष्ट होने से बचाया। श्रीराम एवं लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर के नगर का दर्शन करते हुए फूल लेने बाग में पहुंचे, जहां माता सीता सखियों के साथ गौरी पूजन के लिए फुलवारी में आईं और भगवान को पाने के लिए आशिर्वाद मांगा। मौके पर संजय पांडेय, परमहंस पाण्डेय, ब्रजेन्द्र पांडेय, इंद्रसेनी देवी, दीपक पांडेय, गोल्डी पांडेय, अभय पांडेय, अखिलेश पाण्डेय, बचाउ पांडेय, राजेश मौर्य, प्रतिमा मिश्रा, विश्वात्मा पांडेय, संगीता देवी, अर्चना पांडेय, सुनीता देवी, कृष्णावती देवी आदि रहे।
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