रुक्मिणी विवाह के प्रसंग की कथा सुन श्रोता भावविभोर
Mirzapur News - लालगंज के मझियार गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। कथावाचक कुंदन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में प्रेम, साहस और विश्वास की महत्वपूर्णता पर जोर दिया गया। कथा का अंत भजन-कीर्तन के साथ हुआ।

लालगंज। क्षेत्र के मझियार गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। कथावाचक कुंदन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। कुंदन महाराज ने कहाकि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानती थीं। उन्होंने कहा कि जब रुक्मिणी को ज्ञात हुआ कि उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया है तब उन्होंने अपने हृदय की वेदना एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण तक पहुंचाई। महाराज ने कहा कि यह प्रसंग केवल विवाह का नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास का प्रतीक है।कथा
के दौरान उन्होंने विस्तार से वर्णन किया कि कैसे रुक्मिणी ने भगवान को पत्र लिखकर स्वयं को उनसे स्वीकार करने की प्रार्थना की और कैसे श्रीकृष्ण ने धर्म की रक्षा और भक्त की लाज रखने हेतु विदर्भ पहुंचकर रुक्मिणी का हरण किया। महाराज ने कहा कि यह हरण अधर्म के विरुद्ध धर्म की विजय का संदेश देता है।उन्होंने बताया कि जब रुक्मिणी माता गिरिजा के मंदिर में पूजा करने पहुंचीं, उसी समय श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर वहां पहुंचे और उन्हें अपने साथ द्वारका ले गए। इस प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा वाचक ने कहा कि प्रेम में साहस और विश्वास दोनों आवश्यक हैं। सच्चा प्रेम किसी बंधन से नहीं बंधता बल्कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है।कथा के अंत में भजन-कीर्तन हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। कथा में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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