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1 अक्तूबर, 2020|12:09|IST

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नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू

नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू

1 / 2सूर्योपासना का महापूर्व षष्ठी पूजन कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी गुरुवार को नहाय-खाय से शुरू हो गया। अनुष्ठान करने वाली महिलाओं ने शाम को नये वस्त्र धारण कर चने की दाल, लौकी और नये चावल (भात)...

नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू

2 / 2सूर्योपासना का महापूर्व षष्ठी पूजन कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी गुरुवार को नहाय-खाय से शुरू हो गया। अनुष्ठान करने वाली महिलाओं ने शाम को नये वस्त्र धारण कर चने की दाल, लौकी और नये चावल (भात)...

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सूर्योपासना का महापूर्व षष्ठी पूजन कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी गुरुवार को नहाय-खाय से शुरू हो गया। अनुष्ठान करने वाली महिलाओं ने शाम को नये वस्त्र धारण कर चने की दाल, लौकी और नये चावल (भात) खाया। आस्था और विश्वास के प्रतीक छठी मइया को प्रसन्न करने के लिए चार दिनी सूर्यदेव की उपासना संतानप्राप्ति व सुख-समृद्धि के लिए की जाती है। देश की संस्कृति व परंपरा का अनुष्ठान का पर्व है। छठी मइया को सूर्य देव की मानस बहन माना जाता है। सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए महिलाएं पूजन-अर्चन करती हैं। षष्ठी के दिन अस्ताचलगामी, सप्तमी के दिन उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। अर्ध्य देने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गयी है। खासकर गंगा घाटों व तालाब के किनारे पूजा के लिए स्थान की सफाई शुरू कर दी गयी है। छठ पूजा के लिए व्रती महिलाएं गेहूं को स्वच्छ जल में धुल कर सूखाने के बाद घर में रखे बांस के सूप में सूखे हुए गेहूं की सफाई करती है। इसके साथ ही छठ मइया के पूजन के लिए घर की रसोई से लेकर आगन और अन्य स्थानों की विधिवत सफाई और धुलाई की। छठी मइया के प्रसाद बनाने के लिए जिस आटा चक्की वाले के पास गेहूं दिया जाता है वह भी चक्की की अच्छे से सफाई और धुलाई करने के बाद प्रसाद के लिए गेहूं का आटा तैयार करता है। इसी आटे से छठी मइया का मुख्य प्रसाद ठेकुआ तैयार किया जाएगा।बांस की दौरी और सूप मंगायाछठी मइया के पूजन के लिए अध्यात्मिक दृष्टि से पवित्र माने जाने वाले बांस की दौरी(डलिया), सूप बाजार से खरीदा गया। उसमें प्रसाद आदि रखकर गंगा या नदी व तालाबो पर सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए ले जाया जाता है। यही नहीं गन्ना सूर्य पूजन की खास सामग्री है। अर्घ्य देते समय गन्ने का होना अनिवार्य है। इसी तरह केला भी प्रसाद छठी मइया को अर्पित होता है। नीबू और चावल के लड्डू, पानीदार नारियल पूजन सामग्री में प्रयोग किया जाता है। सप्तमी की सुबह उगते सूरज को अर्घ्य अर्पित करने के बाद नदी, तालाब या गंगा घाट पर ही प्रसाद का वितरण किया जाता है। बाजार में गन्ना लेकर पहुंचे व्यापारीमिर्जापुर। छठ पूजा के मद्दे नजर नगर के प्रमुख स्थानों पर गन्ना का अस्थाई स्टाल लगा रखा है। ग्रामीण इलाके से किसान पिकअप में गन्ना लेकर भरूहना चौराहा, घंटाघर, संगमोहाल आदि इलाके में बेंचना शुरु कर दिए। एक गन्ना का मूल्य 20 से 25 रुपये रखा है। गन्ना से छठ पूजा के लिए मण्डप तैयार किया जाता है।पीतल का सूप भी लोगों ने खरीदा मिर्जापुर। महिलाओं ने छठ पूजा के लिए पीतल का नया सूप जमकर खरीदा। नगर के बसनही बाजार स्थित बर्तन की दुकानों पर पीतल का सूप खरीदने के लिए महिलाएं सुबह ही पहुंच गयी थी। पीतल के सूप की मांग को देखते हुए दुकानदारों ने मूल्य भी बढ़ा दिए थे। फल के दाम भी आसमान पर रहेमिर्जापुर। छठ पूजा के मद्दे नजर बाजारों में फल का दाम भी अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक मूल्य पर बिका। सेब, केला, संतरा आदि के दाम 90 से 100 रुपये प्रति किलो की दर पर बिका। गंगा घाटों की करायी गयी सफाई मिर्जापुर। छठ पूजा के मद्दे नजर नगर के बरियाघाट, पक्केघाट, कचहरी घाट आदि की साफ-सफाई करायी गयी। नगर पालिका के सफाई कर्मी गंगा घाटों पर पड़ी गंदगी की सफाई करने के बाद चूने का छिड़काव किए। गंगा घाटों पर अस्थायी तौर पर प्रकाश की भी व्यवस्था कर दी गयी है।

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  • Web Title:chhath mahaparv started with bathing-eating