कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा की गति करेगी और तेज : कुलपति
Mirzapur News - काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में एआई एकीकरण पर कार्यशाला का समापन किया। उन्होंने छात्रावासों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने शिक्षा में एआई की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

मिर्जापुर। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने सोमवार को राजीव गांधी दक्षिणी परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने न्यू लेक्चर थियेटर में आयोजित “शिक्षण, अधिगम एवं शोध में एआई एकीकरण” विषयक एक दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। कुलपति ने परिसर स्थित विंध्यवासिनी, हिमाद्री एवं नीलगिरी छात्रावासों में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन का उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं और उनके समाधान का आश्वासन दिया। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने एन्थ्रॉपिक के उदाहरण के माध्यम से एआई के तीव्र विकास की ओर संकेत करते हुए कहा कि यह तकनीक जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों को व्यापक रूप से प्रभावित करने जा रही है।
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा की गति को अत्यंत तेज करने वाली है-जो प्रक्रियाएं पहले वर्षों में पूर्ण होती थीं, वे अब विद्यार्थियों की क्षमता के अनुसार महीनों में संभव होंगी। उन्होंने बताया तकनीक ने शिक्षा के विस्तार और पहुँच को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया है तथा पिछले कुछ दशकों में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाया है। कुलपति ने कहा कि एआई उपकरण शोध के क्षेत्र में नए आयाम खोलेंगे और ऐसी संभावनाओं को पहचानने में सक्षम होंगे, जिन्हें मानव मस्तिष्क सामान्यतः नहीं देख पाता। उन्होंने कहा कि प्रासंगिक बने रहने के लिए विश्वविद्यालयों को इस क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों को सकारात्मक रूप से अपनाना होगा। इसी उद्देश्य से उन्होंने परिसर में इस प्रकार की और अधिक कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव भी दिया।विशिष्ट अतिथि, प्रबंधन अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रायः आशंका की दृष्टि से देखा जाता है, जबकि यह मानव उन्नति के लिए उपयोगी एक प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि इसके सार्थक उपयोग के लिए सीखने की इच्छा के साथ-साथ तकनीक के साथ समय देकर जुड़ना आवश्यक है। कार्यक्रम की संरक्षक, कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने समकालीन विश्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम में छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह एवं कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल उपस्थित रहीं। साथ ही प्रो. सीमा तिवारी, डॉ. अनीता सिंह एवं डॉ. शिप्रा थोलिया सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।विद्यार्थियों को शैली के अनुसार मिले सीखने का अवसरराष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान के आईसीटी एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के प्रमुख प्रो. के. श्रीनिवास ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को शिक्षार्थी-केंद्रित एवं अनुभवात्मक अधिगम पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी गति और अपनी शैली के अनुसार सीखने का अवसर मिलना आवश्यक है। कार्यशाला के संयोजक डॉ. रत्न शंकर मिश्र ने कार्यशाला प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रो. बीएमएन कुमार, आचार्य प्रभारी, राजीव गांधी दक्षिण परिसर ने स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य प्रभारी, राजीव गांधी दक्षिण परिसर डॉ. बीएमएन कुमार ने की। इस मौके पर डीडीयू कौशल केंद्र की सहायक आचार्य डॉ. श्रुति सिंह तथा कंप्यूटर विज्ञान विभाग, राजीव गांधी दक्षिण परिसर के सहायक आचार्य डॉ. मनोज कुमार मिश्र उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार मिश्र ने प्रस्तुत किया।कुलपति ने विद्यार्थियों से किया संवादसमापन सत्र के बाद कुलपति ने डीडीयू कौशल केंद्र के बी. वोक एवं एम. वोक विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी समस्याओं एवं चुनौतियों को खुलकर साझा करने का आग्रह किया। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय समुदाय के सभी विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर है, चाहे वे दक्षिणी परिसर के हों या मुख्य परिसर के हो।
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