बैंकों में हड़ताल से तीन सौ करोड़ का लेनदेन ठप

Feb 13, 2026 12:40 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मिर्जापुर
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Mirzapur News - मिर्जापुर में अमेरिका से व्यापार समझौते के विरोध में हड़ताल के दौरान बैंककर्मियों ने चेक क्लियरिंग और अन्य लेनदेन को प्रभावित किया। एआईबीईए और एआईबीओए संगठनों के आह्वान पर बैंकों में तालाबंदी रही। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और कर्मचारियों की समस्याओं को उजागर किया।

बैंकों में हड़ताल से तीन सौ करोड़ का लेनदेन ठप

मिर्जापुर। अमेरिका से किए गए व्यापार समझौते के विरोध में विभिन्न संगठनों के हड़ताल में बैंककर्मियों के शामिल हो जाने से गुरुवार को लगभग तीन सौ करोड़ के चेकों की क्लियरिंग और अन्य लेनदेन नहीं हो पाया। राष्ट्रीय बैंकिंग संगठन एआईबीईए और एआईबीओए समेत बैंक इंपलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बेफी) के राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के आह्वान पर मंडलीय कार्यालय और जिले के समस्त सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में तालाबंदी रही। भारतीय स्टेट बैंक सहित निजी क्षेत्र के बैंकों ने भी बैंकिंग कार्य बंद रखा। नगर के डंकीनगंज स्थित इंडियन बैंक के सामने बैंककर्मियों ने वित्तमंत्री के तानाशाही रवैए के खिलाफ जोरदार धरना प्रदर्शन किए।

इस दौरान हुई सभा के संबोधित करते हुए यूपी बैंक इंम्प्लाइज यूनियन के जिला मंत्री सुरेश पाण्डेय ने कहा कि बैंककर्मियों का 15 दिन के भीतर अपनी मांगों से संबंधित दूसरी हड़ताल है। सरकारी क्षेत्र के बैंक सहित एलआईसी एवं जीआईसी को पूर्णरूप से निजी क्षेत्र में देने के लिए सरकार साजिश कर रही है। यह देश की आम जनता के साथ धोखा है। समझौता होने का बावजूद वित्तमंत्री पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू नहीं कर रही है। बैंकों में स्टाफ की भारी कमी है। लगभग दो लाख पद केवल बैंकों में रिक्त पड़े है। फिर भी करोड़ों शिक्षित बेरोजगार आज विवश होकर अपने भविष्य की चिंता में सड़क पर ठोकरे खा रहे हैं। उनके प्रति संवेदना दिखाने की बजाय यह सरकार शोषण के साथ ठेका प्रथा लागू करना चाहती है। देश के जनप्रतिनिधियों को आजीवन पेंशन मिलता है परंतु 60 वर्ष कार्य करने वाले कर्मियों को पेंशन का अधिकार नहीं। कार्पोरेट घरानों पर अरबों रुपयों बकाए एवं डूबे कर्ज की वसूली के लिए कड़े कानून बनाए जाए। बैंकों में आम ग्राहकों के लिए सेवा शुल्क कम किए जाए। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करते हुए एडहॉक पर नियुक्ति अविलंब बंद कर उन्हें स्थाई नियुक्ति दी जाए। आईडीबीआई बैंक को बेचने का निर्णय वापस लिया जाए। प्रदर्शन करने वालों में आशीष मिश्रा, प्रभु नारायण, आशीष गौतम, दीपक, घुटुर, मनीष तिवारी, रविशंकर सिंह, अभिषेक परिहार, कु. हंसिका अग्रहरी, अजय चौबे, राजेश यादव, राजेंद्र, विजय कुमार, सुधीर मिश्रा, भरत लाल, बी बी लाल श्रीवास्तव, केदारनाथ सविता, संजू, सुरेंद्र उमर, ओम यादव, अमिताभ अली, कमालु सोनकर, राहुल भारती, बाल कुमार, आशीष जायसवाल, विकास कुमार, राजेश्वर यादव आदि।

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