वैलेंटाइन-डे पर मुस्लिम लड़के के साथ मंदिर पहुंची नाबालिग लड़की, हिंदू संगठनों ने कर दिया हंगामा
हापुड़ में मुस्लिम समाज के लड़के के साथ नाबालिग लड़की दिल्ली रोड स्थित एक मंदिर पहुंच गई। मंदिर में दोनों अजीब हरकतें करने लगे। इसकी सूचना जब हिंदू संगठनों को लगी तो वह भी मौके पर पहुंचे और लव जिहाद की साजिश बताते हुए जमकर हंगामा करने लगे।

यूपी के हापुड़ में मुस्लिम समाज के लड़के के साथ नाबालिग लड़की दिल्ली रोड स्थित एक मंदिर पहुंच गई। मंदिर में दोनों अजीब हरकतें करने लगे। इसकी सूचना जब हिंदू संगठनों को लगी तो वह भी मौके पर पहुंचे और लव जिहाद की साजिश बताते हुए जमकर हंगामा करने लगे। इसकी सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच कर लोगों को समझाया।
जानकारी के अनुसार कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत आनंद विहार कालोनी के रहने वाला एक दूसरे समुदाय का युवक प्रेमिका को साथ वैलेंटाइन डे पर दिल्ली रोड स्थित एक मंदिर में पहुंचा। जहां दोनों एकांत में बैठ कर अजीब हरकतें कर रहे थे कि अचानक हिंदू संगठन के कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। संगठन के कार्यकर्ताओं ने बताया कि पुजारी से मिली सूचना पर वह मंदिर में पहुंचे। जैसे ही कुछ कार्यकर्ताओं ने युवक से पूछताछ की तो किशोरी डर के मारे रो पड़ी। कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची।
विश्व हिंदू परिषद मेरठ विभाग के मंत्री सुधीर अग्रवाल ने किशोरी को उसके परिवार को सौंपने की मांग की। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विनोद पांडेय ने बताया कि प्रेमी युगल को कोतवाली ले आई। प्रारंभिक पूछताछ की गई। किशोरी के परिजनों को बुलवाया गया। थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों नाबालिग हैं और चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। इस संबंध में कोई तहरीर नहीं दी गई है।
मुरादाबाद में वैलेंटाइन-डे के विरोध में सड़कों पर उतरे शिवसैनिक
मुरादाबाद में शिवसेना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) के कार्यकर्ता शनिवार को वैलेंटाइन-डे के विरोध में सड़कों पर उतरे और शहर में कई जगहों पर प्रदर्शन करके वैलेंटाइन डे मनाने को लेकर अपना विरोध जाहिर किया। रामगंगा विहार स्थित वेव मॉल समेत कई जगहों पर शिवसैनिकों ने प्रदर्शन करके वैलेंटाइन डे के विरोध में नारे लगाए।
गोंडा में वैलेंटाइन-डे का कार्ड जलाकर जताया विरोध
वैलेंटाइन डे को भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य सभ्यता का आक्रमंण बताते हुए बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने वैलेंटाइन डे का बधाई कार्ड जलाकर अपना विरोध जताया। यही नहीं पदाधिकारियों ने युवाओं से राधा - कृष्ण व शिव - पार्वती के प्रेम से प्रेरणा लेने का भी आह्वान किया। शनिवार दोपहर बजरंग दल कार्यकर्ता रामलीला मैदान पर एकत्र हुए और यहीं से विहिप सह विभाग मंत्री भरत गिरि व बजरंग दल के सोनू सोनकर के नेतृत्व में हनुमानगढ़ी चौराहे पहुंचे, वहां पर उन्होंने वैलेंटाइन डे के बधाई कार्ड को जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
पदाधिकारियों ने कहा कि वैलेंटाइन डे के नाम पर देश में फूहड़ता व अश्लीलता फैलाई जा रही है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा और संगठन हर स्तर पर इसका विरोध करेगा व जन जागरण अभियान भी चलाएगा। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक राकेश वर्मा गुड्डू ने कहा कि कि हिंदू संस्कृति में प्रेम के सबसे बड़े प्रतीक राधा कृष्ण का प्रेम व शंकर पार्वती का प्रेम है प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। आज जब पूरा विश्व भारतीय संस्कृति का अनुसरण कर रहा है ऐसे में भारतीय लोगों का पाश्चात्य सभ्यता का अनुसरण करना अत्यंत दुखद है वह निंदनीय है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


