मेरठ: दुनिया के बड़े लोकतंत्र में चुनावों को समझेंगे युवा
Meerut News - -विश्वविद्यालयों के यूजी-पीजी स्टूडेंट चुनाव से जुड़ी शख्सियतों से कर सकेंगे बात -चुनाव आयोग के

मेरठदुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव और इसके प्रबंधन को युवा सीधे जुड़कर समझ सकेंगे। ना केवल भारत बल्कि विभिन्न देशों में चुनाव प्रणाली, कानूनी ढांचे, संस्थागत व्यवस्था और चुनाव प्रबंधन निकायों द्वारा अपनाए जा रहे नवाचारों पर शोध करने का मौका भी मिलेगा। छात्र चुनाव विशेषज्ञों से बातचीत कर सकेंगे। शोध और संवाद की इस यात्रा से युवा भारत में चुनाव, चुनाव आयोग और इससे जुड़े निकायों की कार्यशैली एवं प्रणाली को समझकर भ्रांतियों से दूर रह सकेंगे। भारतीय निर्वाचन आयोग के भारतीय अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं चुनाव प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) ने लोकतंत्र एवं चुनाव प्रबंधन क्षेत्र में अनुसंधान, अकादमिक और छात्र सहभागिता मजबूत करने के लिए उक्त पहल की है।
यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों से उक्त पहल में युवाओं को प्रतिभाग कराने के लिए प्रोत्साहित किया है।तीन पहल में छात्र लेंगे हिस्सापहली पहल है लोकतंत्र एवं चुनाव प्रबंधन पर अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन। 18-19 जून को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए आवेदकों से एब्सट्रेक्ट मांगे गए हैं। इसमें संकाय सदस्य और शोधार्थी लोकतांत्रिक शासन एवं चुनाव प्रबंधन के समकालीन मुद्दों पर साक्ष्य केंद्रित संवाद में हिस्सा लेंगे।दूसरी पहल है छात्र संपर्क। इसमें लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर शोध प्रतियोगिता होगी। इसमें यूजी-पीजी के छात्र हिस्सा ले सकेंगे। यह प्रतियोगिता विभिन्न देशों में चुनाव प्रणाली, कानूनी ढांचे, संस्थागत व्यवस्था और चुनाव प्रबंधन निकायों द्वारा लागू नवाचारों पर केंद्रित होगी।तीसरी पहल है लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर अकादमिक आउटरीच प्रोग्राम। इसमें विवि कैंपस एवं कॉलेजों के छात्र आईआईआईडीईएम कैंपस में एक दिन की अकादमिक यात्रा कर सकेंगे। इसमें छात्र एवं संकाय सदस्य चुनाव विशेषज्ञों के साथ बातचीत करते हुए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी हासिल कर सकेंगे।
लेखक के बारे में
Praveen Dixitशॉर्ट बायो : प्रवीण दीक्षित पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान मेरठ में उच्च शिक्षा, मौसम एवं प्रदूषण बीट पर काम कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
प्रवीण दीक्षित भारतीय मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) उच्च शिक्षा, मौसम एवं प्रदूषण बीट पर काम कर रहे हैं। 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
कॅरियर का सफर
प्रवीण दीक्षित ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2006 में अमर उजाला अखबार से की। यहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2008 में हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। अमर उजाला और हिन्दुस्तान दोनों ही समाचार पत्रों में उन्हें शिक्षा, मौसम और पर्यावरण बीट पर काम करने का मौका मिला। 2008 से वे हिन्दुस्तान में लगातार इन बीट को कवर कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीएससी बायोलॉजी, बीएड के साथ-साथ हिन्दी और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर होने से प्रवीण को विज्ञान, हिन्दी और पत्रकारिता का विशेष संयोजन मिला। इसी वजह से वह शिक्षा, विशेष रूप से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा पर कमांड के साथ ही इनोवेशन, रिसर्च और डाटा विश्लेषण पर केंद्रित स्टोरीज़ लिख रहे हैं।
उच्च शिक्षा और लक्ष्य
उच्च शिक्षा, मौसम और इससे जुड़े रिसर्च के विषयों पर प्रवीण की गहरी समझ है। उच्च शिक्षा में उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। प्रवीण का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
विशेषज्ञता
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, शोध, यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई । डाटा विश्लेषण और इस पर केंद्रित समाचार
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