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12 दिसंबर, 2019|9:29|IST

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अर्हम ध्यान योग साधना में तन के साथ मन होता है निर्मल : प्रणम्य

अर्हम ध्यान योग साधना में तन के साथ मन होता है निर्मल : प्रणम्य

ईस्टर्न कचहरी रोड स्थित शंकर आश्रम में चल रहे अर्हम ध्यान योग साधना शिविर में बुधवार को अर्हम योग प्रणेता जैन मुनि प्रणम्य सागर महाराज ने योग साधना का महत्व बताया। उन्होंने योगासनों का अभ्यास कराया। पुनीता जैन, मुदित जैन दिल्ली मौजूद रहे।

मेरठ समाज के पुण्य उदय से असौड़ा हाउस जैन समाज द्वारा परम पूज्य मुनि प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में अर्हम ध्यान योग साधना शिविर का आयोजन शंकर आश्रम में किया गया। मुनि श्री ने कहा कि यह एकदम नए तरह की ध्यान योग साधना है जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि इसमें तीन बातों को शामिल किया गया है ध्यान ‘योग साधना।

इस अर्हम ध्यान योग साधना का उद्देश्य है व्यक्तियों को ऐसे सुख और आनंद की पहचान कराना जो उसके अंदर ही छिपी है। उसको वह जानता ही नहीं है। यह तो हमने कई बार सुना है कि अपने अंदर ही शांति है, आनंद है लेकिन उस आनंद और शांति तक कैसे पहुंचा जाए उसी का मार्ग इस ध्यान योग साधना में बताया गया।

यह शिविर साधना के षटकर्मों पर आधारित है जिसके बारे में हम बहुत कम जानते हैं। ये षटकर्म हैं सामाजिक्र, स्तवन, वंदना, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान और करयेत्सर्ग। पुनीता व मुदित ने बताया कि प्रत्येक दिन एक कप्रिया का अभ्यास किया जाता है उसे समझाया जाता है। पहले थ्योरी में समझाया जाता है फिर उसका प्रैक्टिकल कराया जाता है। बुधवार को आरएसएस के दर्शन लाल अरोड़ा, धनीराम, विनोद एवं विनोद भारती, डॉ. दिनेश उपाध्याय ने भी महाराज जी को श्रीफल भेंटकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर उपस्थित जैन, कपिल जैन, सुभाष, प्रवीण, तानिया, संपदा, अन्नू, शाश्वत, लकी, प्रतीक, पूनम, साहिल, सक्षम, रचित, राकेश, सोनिया की विशेष उपस्थित रहीं।

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