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30 नवंबर, 2020|6:49|IST

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देश-विदेश तक मेरठ की महिलाओं का दबदबा

देश-विदेश तक मेरठ की महिलाओं का दबदबा

प्रत्येक वर्ष 26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाया जाता है। भारत में आजादी के बाद से महिलाओं को वोट देने का अधिकार तो प्राप्त था, लेकिन पंचायतों तथा नगर निकायों में चुनाव लड़ने का कानूनी अधिकार बहुत दिनों बाद मिला।

इसी का परिणाम है कि आज भारत की पंचायतों में महिलाओं की 50 प्रतिशत से अधिक भागीदारी है। वहीं, महिलाओं को समानता का दर्जा दिलाने के लिए कुछ महिलाओं ने बहुत संघर्ष किया। बहरहाल, आज हम अपने मेरठ की स्थिति भी देखें, तो महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। राजनीति, विज्ञान, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, खेल सभी क्षेत्रों में मेरठ की महिलाओं का नाम देश-विदेश तक हैं।

पुलिस विभाग में भी मेरठ में आधी आबादी कर रही सुरक्षा

मेरठ की बात करें, तो पुलिस विभाग में महिलाएं खूब आ रही हैं और पुरुषों के बराबर ड्यूटी भी देती हैं। मेरठ में डीएसपी के पद पर महिला, आरएएफ में भी सीनियर पोस्ट पर महिला हैं।

- सवा दौ सो महिला पुलिसकर्मी

- आरएएफ में 108 बटालियन में 90 महिला जवान

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विज्ञान की दुनिया में देश-विदेश तक नाम

इसके अलावा देश विदेश तक भी मेरठ की महिलाओं का नाम है। जीका वायरस की खोज करने वाली देविका सिरोही, चंद्रयान दो से जुड़ी मेरठ की बहु और रेखा जाखड़ जोकि इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय पटल पर नाम कर रही हैं।

महिला साक्षरता

इस्माईल पीजी गर्ल्स कालेज की डॉ. शिवाली अग्रवाल ने बताया कि साक्षरता दर में महिलाएं आज भी पुरुषों से पीछे हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार महिलाओं की साक्षरता दर में 12 प्रतिशत की वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन केरल में जहां महिला साक्षरता दर 92 प्रतिशत है, वहीं बिहार में महिला साक्षरता दर अभी भी 53.3 प्रतिशत है।

खुद की परवाह किए बगैर निभाई जिम्मेदारी

कोरोना वायरस से जंग लड़ने वाले बहुत से ऐसे लोग हैं, जो मरीजों की सेवा में दिन रात लगे हैं। महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों के लिए काम करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना योद्धा के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई है। जनपद में 2276 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां हैं, जिन्होंने घर-घर जाकर सर्वे किया। महामारी से संक्रमित लोगों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी।

फावड़ा उठाकर कर रही घर का लालन-पालन

कहते हैं महिलाओं के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। यह साबित किया है ग्रामीण क्षेत्र की उन महिलाओं ने जिन्होंने कोरोना काल के संकट की घड़ी में अपने घर का लालन-पालन के लिए फावड़ा उठाकर पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। साथ ही, संकट की इस घड़ी में अपने परिजनों का सहयोग किया। ग्रामीण क्षेत्र में चलाई जा रही मनरेगा योजना में 40 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही है।

खुद हो रहीं आत्मनिर्भर

आजीविका मिशन से जुड़कर महिलाएं खुद आत्मनिर्भर बन रही हैं। जनपद में 2400 स्वयं सहायता समूह का संचालन किया जा रहा है। समूह के माध्यम से महिलाएं अपने काला को पहचान देने में वह रोजगार के अवसर पैदा करने में सफल साबित हो रही हैं।

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  • Web Title:Women and women of Meerut reach the country and abroad