आचरण से हीन ज्ञान, बोझ के समान : भाव भूषण महाराज
श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में त्रय तीर्थंकरों का जलाभिषेक किया गया। आचार्य भाव भूषण महाराज ने भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। 140 परिवारों ने विधान में भाग लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में कई जैन समाज के सदस्यों का सहयोग रहा।
जैन तीर्थ क्षेत्र पर स्थित श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में मुख्य वेदी पर विराजमान त्रय तीर्थंकरों का जलाभिषेक किया गया। तत्पश्चात् शांतिधारा सरला जैन‚ प्रमोद जैन‚ सुबोध जैन‚ प्रवेश जैन‚ चित्रांश जैन ने की। आचार्य भाव भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति धर्म प्रधान संस्कृति है। यहां भोग को नहीं योग को, यहां साधन को नहीं साधना को, यहां दवा के साथ दुआ को, ज्ञान व गुण के साथ चरित्र को महत्व दिया जाता है और सर्वत्र चरित्र की ही पूजा होती है। आचरण से हीन ज्ञान, बोझ के समान है।
ज्ञान थोड़ा किन्तु आचरण से ठीक है वह सज्जन लोक में पूज्य व प्रभावशाली है। विधान के 11वें दिन 140 परिवारों ने विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित लिया। सांयकाल में भगवंतों की आरती की गई। रात्रि में गुरुकुल के छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें गुरुकुल के छात्रों को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुकेश जैन, राजेंद्र जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन‚, उमेश जैन, कमल जैन‚, सुदर्शन जैन‚ गुरमीत सिंह,‚ अनुपम आदि का सहयोग रहा।
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