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13 नबम्बर, 2019|6:19|IST

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मुंह में कोई घाव, गांठ को हल्के में न लें

मुंह में कोई घाव, गांठ को हल्के में न लें

लाला लाजपत राय मैमोरियल मेडिकल कॉलेज में चल रही तीन दिवसीय यूपी एसीकॉन-2019 के अंतिम दिन सिमपोजियम एवं सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने लंग्स, मुंह के कैंसर के विषय में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुंह में कोई घाव, छाला या गांठ हो जाए तो इसको नजर अंदाज न करें। अगर कई हफ्ते तक छाला, घाव और गांठ ठीक नहीं होती तो इसकी विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराए।

कार्यक्रम में बनारस से आए डॉक्टर मनोज पांडे ने मुख कैंसर के बारे में जानकारियां दी। राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ से आए डॉ. विकास सिंह ने दूरबीन द्वारा किए जाने वाले ऑपरेशन के बारे में बताया। ब्रेस्ट कैंसर पर पैनल डिस्कशन हुआ, जिसमें डॉ. वी भटनागर, डॉ. उमंग मित्तल, डॉ. शलांका जोशी ने महत्वपूर्ण जानकारियां दी। पैनक्रियाज की बीमारी के पैनल डिस्कशन में डॉ. राजेश कपूर, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. एचएस नाग ने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में केजीएमयू एवं मुरादाबाद मेडिकल कॉलेज के छात्रों एवं लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ के डॉ. नितिन चौहान समेत अन्य छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

कांफ्रेंस में चेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता, सचिव डॉ. सुधीर राठी, वरिष्ठ सर्जन डॉ. वीबी भटनागर, एसजीपीजीआई लखनऊ से डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अवनीश, डॉ. अरशद, डॉ. संदीप, डॉ. पाहवा, चंडीगढ़ से डॉ. टीडी यादव, आयोजन समिति के डॉ. धीरज राज, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. मेधावी तोमर, डॉ. नवनीत अग्रवाल, डॉ. विरेंद्र कुमार, डॉ. गौरव गुप्ता शामिल रहे।

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सड़क दुघर्टना में जा रही यूथ की जान

केजीएमयू लखनऊ के न्यूरो सर्जन डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि यूपी में सर्वाधिक मौत सड़क दुघर्टनाओं में हो रही हैं। इनमें मरने वाला यूथ है। अगर चार ई (एजुकेशन, इंफोर्समेंट, इंजीनियर, इमरजेंसी ट्रीटमेंट)को ध्यान में रखा जाए तो हम सड़क दुघर्टनाओं की रोकथाम कर सकते हैं। कहा कि सबसे पहले समाज का शिक्षित होना जरूरी है ताकि वह नियमों का पालन कर सके। इसके बाद आचरण महत्व रखता है। इंजीनियर कुशल हों, ताकि सड़कें अच्छी बनें। वहीं इमरजेंसी सुविधा भी बेहतर होनी चाहिए। कहा कि ट्रामा में रहने वाले स्टाफ को देश के बड़े ट्रोमा सेंटर में छह माह की ट्रेनिंग अनिवार्य है। ट्रेनिंग के बाद जब यह स्टाफ ट्रोमा में काम करेगा तो इसके बेहतर रिजल्ट मिलेंगे।

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क्लीन लंग्स के लिए क्लीन एयर जरूरी

केजीएमयू के प्रोफेसर फेफड़ा सर्जन डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि वातावरण में फैले वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़े कमजोर होने के साथ गंभीर इंफेक्शन की चपेट में हैं। फेफड़ों की टीबी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से फेफड़ों की झिल्ली का फटना, पस पड़ना और गंभीर निमोनिया जैसी परेशानी सामने आ रही है। इसकी दूरबीन से सर्जरी कर फेफड़े रिपेयर किए जा रहे हैं। बस मरीज को सही समय पर फेफड़ों के सर्जन के पास रेफर हो जाना चाहिए। स्मोकिंग की वजह से लोग सीओपीडी के गंभीर इंफेक्शन से ग्रस्त हैं। मरीज डाक्टर से बिना जाने बीच में दवा बंद कर देते हैं। इसकी वजह से सीओपीडी क्रोनिक हो जाती है। क्लीन लंग्स तभी होंगे जब हमें क्लीन एयर मिलेगी।

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मुंह में कोई घाव, गांठ को हल्के में न लें

केजीएमयू लखनऊ के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिनव अरुण सोनकर ने बताया कि ओरल कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे है। इसकी वजह तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट और एल्कोहल है। ओरल कैंसर के मरीजों में आधे से ज्यादा ऐसे होते हैं, जो तम्बाकू या फिर अन्य नशे करते हैं। अगर कोई मुंह में कोई घाव, छाला या गांठ हो जाए तो इसको नजर अंदाज न करें। अगर कई हफ्ते तक छाला, घाव और गांठ ठीक नहीं होती तो इसकी विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराए। लोगों में बॉयोस्कोपिक जांच को लेकर अभी भ्रांतियां हैं कि एक बार इसमें सूई लग गई तो बीमारी तेजी से फैल जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है। शुरुआती स्टेज में जांच कर हम काफी हद तक कैंसर को खत्म कर सकते हैं।

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