कुछ भी हो मगर मुल्क को जलने नहीं देंगे...
गुफ्तगू और हम फाउंडेशन की ओर से एक शाम एकता के नाम पर मेरठी में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कई शायरों ने अपने कलाम पेश किए। मुख्य अतिथि विपिन चौधरी और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। शायरों ने श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

गुफ्तगू और हम फाउंडेशन की ओर से एक शाम एकता के नाम के मौके पर शायर जश्न-ए-फखरी मेरठी पर एक ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन हजरत बाले मियां मजार मेला नौचंदी में किया गया। शायर-ए-ऐजीजी के तौर पर खुर्शीद हैदर एवं निकहत अमरोहवी को सम्मानित किया। मुख्य अतिथि सपा प्रदेश सचिव विपिन चौधरी एवं जिला अध्यक्ष भाकियू किसान अनस ठाकुर रहे। पूर्व विधायक मुरादनगर वहाब चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाकियू मांगे राम त्यागी ने शमा रोशन की। अति विशिष्ट अतिथि आज़ाद समाज पार्टी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव निजम चौधरी एवं थाना प्रभारी नौचंदी अनूप कुमार सिंह रहे। वाजिद मेरठी ने कलाम पेश करते हुए कहा कि अरमान सियासत का निकलने नहीं देंगे, ये फूल मुहब्बत का मसलने नहीं देंगे, हम मिल के कसम खाएं चलो आज ये वाजिद कुछ भी हो मगर मुल्क को जलने नहीं देंगे। परवाना मेरठी ने मुनसलिक होने नहीं देता हर इक दरबार से हम तो आजिज़ आ चुके हैं इस दिल ए ख़ुद्दार से अपना कलाम पेश करके श्रोताओं को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ दाद देने को मजबूर कर दिया。
कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम के संयोजक रमीज वाहिद इश्काबादी, फैज़ान काश्मीरी, गुड्डू एवं गुफ्तगू और हम फाउंडेशन की आयोजन समिति ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। संचालन शायर तारिक उस्मानी ने किया। इस दौरान सपा महानगर अध्यक्ष हाजी आदिल चौधरी, मोहम्मद बदर महमूद, अबरार अहमद, वरिष्ठ समाजसेवी हाजी मोइनुद्दीन, वक्फ मुफ्ती मोहम्मद अशरफ रहे।
शायरों की प्रस्तुति
इन शायरों ने भी लूटी श्रोताओं की वाहवाही
शायरों में परवाना मेरठी, ताहिर निजामी, अकबर बुटराड़वी, इरशाद बेताब, अमजद आतिश, शुऐब गुल, वाजिद मेरठी, तस्लीम आरफी, फैसल मेरठी, अल्तमश इरफान, उमर इजहार, अली खान जोहर, साबिर अजराड़वी, आरिफ जमाली, अरुण शर्मा, दानिश, साकिब मेरठी, दानिश अनवर, मलिक रिजवान, दानिश रहबर, सुहैल आतिर, रमीज माविया, दानिश गजल ने कलाम पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
वो दुनिया थी जहां तुम बंद करते थे जबां मेरी...
फैजान कश्मीरी ने वो दुनिया थी जहां तुम बंद करते थे जबां मेरी, ये महशर है यहां सुननी पड़ेगी दास्तां मेरी एवं दानिश दानी लगेगी सभी को मेरी तल्ख़ बातें मैं हक बात जो इस कदर कर रहा हूं। डॉ. शुऐब गुल ने बंद आंखों से तमाशा नहीं देखा जाता जेब खाली हो तो मेला नहीं देखा जाता के जरिए श्रोताओं की तालियां बटोरी। रमीज वाहिद इश्क़ाबादी ने गजल का हुस्न गायब है गजल से के शायर अब निकम्मे हो रहे हैं और ख्वाजा तारिक उस्मानी ने बदगुमां हो गया है मुझसे कबीला मेरा। दूसरे आज भी सरदार समझते हैं मुझे एवं साकिब मेरठी ने जो सब से कहता था ये नूर चश्म हैं मेंरे, वो बेटे-बाप को चश्मा दिला नहीं सकते अपने कलाम से नवाजा。
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


