श्रीमद्भागवत कथा : श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण का उदाहरण

Apr 04, 2026 06:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, मेरठ
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Meerut News - नगर के प्राचीन श्री झारखंडी शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में भागवत भूषण स्वामी साक्षी गोपाल नंद महाराज ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम और भक्ति में दिखावा नहीं होता। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही और कार्यक्रम का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण से हुआ।

श्रीमद्भागवत कथा : श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण का उदाहरण

नगर के प्राचीन श्री झारखंडी शिव मंदिर में कई दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक भागवत भूषण स्वामी साक्षी गोपाल नंद महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता का वर्णन किया। कथावाचक भागवत भूषण स्वामी साक्षी गोपाल नंद महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। गुरुकुल में साथ अध्ययन करने वाले इन दोनों मित्रों के बीच गहरा स्नेह था। समय के साथ जहां श्रीकृष्ण द्वारका के राजा बने, वहीं सुदामा अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत करने लगे, लेकिन उनके हृदय में मित्र के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ।

श्रीमहाराज ने आगे कहा कि सुदामा की पत्नी के आग्रह पर वे अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। उनके पास भेंट स्वरूप देने के लिए केवल थोड़े से चिउड़े (पोहा) थे, जिसे वे संकोचवश छुपाते रहे, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र के प्रेम को समझते हुए अत्यंत आदर के साथ उनका स्वागत किया और उनके लाए हुए सादे उपहार को बड़े प्रेम से ग्रहण किया।कथा के दौरान महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण ने बिना कुछ कहे ही सुदामा की दरिद्रता दूर कर दी। जब सुदामा अपने घर लौटे तो उन्होंने देखा कि उनकी झोपड़ी एक भव्य महल में परिवर्तित हो चुकी है। यह प्रसंग यह संदेश देता है कि सच्चे प्रेम और भक्ति में किसी प्रकार का दिखावा नहीं होता, और भगवान भक्तों की भावना को देखकर ही प्रसन्न होते हैं।स्वामी साक्षी गोपाल नंद महाराज ने कहा कि सुदामा की तरह हमें भी जीवन में सादगी, संतोष और सच्चे मित्रत्व को अपनाना चाहिए। भगवान केवल भक्ति और भाव के भूखे हैं, न कि बाहरी आडंबर के। कथा के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धा और भक्ति के साथ कथा का श्रवण किया तथा भजन-कीर्तन में भाग लेकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उधर कथा आयोजक विनोद कुमार ने बताया कि कल रविवार को सुबह करीब 8:30 बजे श्रीविष्णु यज्ञ किया जायेगा। यज्ञ के बाद भंडारे व प्रसाद वितरण होगा।

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