अज्ञानता के कारण हमारी पवित्रता नष्ट हो रही : विमर्श सागर
Meerut News - हस्तिनापुर में श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में श्री सिद्धचक्र विधान का पाचवां दिन मनाया गया। इस दौरान जाप अनुष्ठान और अभिषेक किया गया। आचार्य विमर्श सागर महाराज ने जीवन में मन, वचन और काय से देव दर्शन की महत्वता बताई। सांयकाल महाआरती, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान के पाचवें दिन जाप अनुष्ठान एवं मुख्य वेदी पर अभिषेक किया गया। भगवान की शांतिधारा की गई जो कमला जैन, मंजू जैन, पर्व जैन, शनाया जैन ने की। सिद्धचक्र महामंडल विधान करते हुए कर्मों के नाश हेतु 256 अर्घ्य पर समर्पित किए गए। अनिल जैन‚, सुकांत जैन आदि ने मांडले पर अर्घ्य समर्पित किए। आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य को जीवन में मन-वचन-काय से नित्य देव दर्शन कर अपने नित्य क्रिया कलापों में लगना चाहिए। जीवन में राग-द्वेष आदि से विरक्त होकर‚ आत्म कल्याण के साथ दूसरों के सुख की कामना करनी चाहिए।
इससे जीवन सुख, शांति व समृद्धि को प्राप्त करेगा। जिस प्रकार भोजन के बाद मुख की शुद्धि आवश्यक है, उसी प्रकार मन की शुद्धि भी अनिवार्य है। कहा कि अज्ञानता के कारण हमारी पवित्रता नष्ट होती रहती है। कहा कि धन जीवन की आवश्यकता तो हो सकती है पर जीवन के लिए धन की आसक्ति जरूरी नहीं है। सांयकाल में भगवान की महाआरती‚ भजन संध्या व सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए। कार्यक्रम में जीवेंद्र जैन, मुकेश जैन, राजेंद्र जैन, राजीव जैन‚, विजय जैन, अतुल जैन, प्रबंधक मुकेश जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कुश जैन, शुभम जैन आदि रहे।
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