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21 नवंबर, 2019|7:11|IST

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सम्यक ज्ञान की प्राप्ति कर स्वयं को बना सकते हैं भगवान : प्रणम्य सागर

सम्यक ज्ञान की प्राप्ति कर स्वयं को बना सकते हैं भगवान : प्रणम्य सागर

अर्हम योग प्रणेता परम पूज्य मुनि प्रणम्य सागर जी महाराज ने सदर दुर्गाबाड़ी में मधुर प्रवचनों से भक्तिरस की वर्षा की। उन्होंने राग, दोष, कर्म आदि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने सम्यक ज्ञान की महत्ता को बताते हुए कहा कि व्यक्ति सम्यक ज्ञान की प्राप्ति कर स्वयं को भगवान बना सकता है।

महाराजश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि किस प्रकार से हम अपने जीवन में कोई भी नियम धारण कर उत्तम गति प्राप्त कर सकते हैं। नास्तिक व आस्तिक का भेद बताते हुए कहा कि अपने अस्तित्व को पहचानना आस्तिकता की सबसे पहली पहचान है। जैन दर्शन के अनुसार प्रत्येक मनुष्य अपने कर्मों से, सम्यक ज्ञान की प्राप्ति कर स्वयं को भगवान बना सकता है। अपने आप को भगवान का अंश मानना एक भूल है।

मुनि श्री के दर्शन के लिए रविवार को भारतीय जनता पार्टी मेरठ महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंहल और छावनी मंडल अध्यक्ष अंकित सिंहल भी दिगम्बर जैन मन्दिर दुर्गाबाड़ी सदर मेरठ में आए। दोनों ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुकेश सिंहल ने सदर जैन समाज का आभार जताया और मुनिश्री के असीम ज्ञान को नमन किया। इस मौके पर सुनील जैन सर्राफ, दिनेश जैन मंत्री, कोषाध्यक्ष मृदुल जैन आदि रहे।

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