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‘गुरु के प्रति शिष्य को होना चाहिए कृतज्ञ

‘गुरु के प्रति शिष्य को होना चाहिए कृतज्ञ

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रविवार को गढ़ रोड स्थित राधा गोविंद मंडप में सत्संग हुआ। आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी नरेंद्रनंद ने बताया कि गुरु और शिष्य के प्रगाण प्रेम को संसार ककी कोई भी शक्ति मिटा नहीं सकती। ईश्वरीय व गुरू प्रेम को शब्दां मं व्यक्त करना संभव नहीं है। लेकिन जीवात्मा इसका अनुभव कर आनंदित हो जाती है।

पूर्ण गुरु की कृपा से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति से मनुष्य ईश्वर को जान पाता है और उसके उपरांत प्रेम जागृत होता है। जहां एक ओर दुनिया के प्रति किया हुआ समर्पण हमारी ऊर्जा का क्षय कर उसे समाप्त करने लगता है, वहीं दूसरी ओर गुरु के प्रति हमारी भक्ति व समर्पण हमें नई शक्ति व ऊर्जा प्रदान करती है। एक आदर्श शिष्य चाहे छांव हो या धूप, अनुकूल परिस्थिति हो या प्रतिकूल हर समय गुरु के प्रति कृतज्ञ रहता है।

शिष्य जब इस भाव को बनाए रखता है तो धीरे-धीरे उसकी सभी इच्छाएं समाप्त होने लगती हैं और वह शाश्वत आनंद की ओर बढ़ने लगा है। वास्तव में वह भक्त ही संसार का सबसे खुश व्यक्ति बन जाता है। लोकेशा भारती ने कहा कि आध्यात्मिक आहार का अभिप्राय है ध्यानद्वारा ईश्वर के साथ समय स्थापित करना। ईश्वर से जुड़कर व्यक्ति आध्यात्मिक सशक्तिकरण को प्राप्त करता है, जिसके माध्यम से वह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में आने वाली हर समस्या का सामना करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर पाता है।

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