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21 सितम्बर, 2020|5:46|IST

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विनय से परिपूर्ण व्यक्ति ही होता है विद्वान : ज्ञानमती

विनय से परिपूर्ण व्यक्ति ही होता है विद्वान : ज्ञानमती

जंबूद्वीप स्थित आचार्य श्री शांतिसागर प्रवचन हॉल में चल रहे इंद्र ध्वज महामंडल विधान में रूचकगिरि पर्वत के जिनालयों की पूजन अर्चना की गई। मंडल पर चारों दिशाओं में चार अर्घ्य समर्पित किए गए। दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म मनाया गया।

गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि आत्मा को सर्वशक्तिमान ब्रह्मस्वरूप कहा गया है। जो मुनिराज अपने चित्त को स्थिर करके ब्रह्मस्वरूप आत्मा में विचरण करते हैं, आत्मा का चिंतन करते हैं। वे सद्गुण रूपी संपत्ति को प्राप्त करते हैं। आत्मस्वरूप में लीन रहना ही है उत्तम ब्रह्मचर्य है। आज रत्नात्रय के द्वितीय दिवस सम्यक ज्ञान का दिवस है। जिसमें ज्ञान पर आवरण डालना ज्ञानावरण कर्म का बंद कराता है। व्यक्ति विद्वान वही है जो विनय गुण से परिपूर्ण है। इस प्रकार से रत्नात्रय धर्म का पालन करना चाहिए। दोपहर में अनंत चतुर्दशी व्रत के उपलक्ष्य में भगवान अनंतनाथ विधान संपन्न किया गया। मंगलवार को जैनधर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूच्यनाथ का निर्वाण कल्याणक महोत्सव मनाया गया और निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। आर्यिका श्री चंदनामती माताजी का उत्तम ब्रह्मचर्य पर प्रवचन संपन्न हुआ। प्रात:काल भगवान वासुपूच्य के अभिषेक से प्रारंभ हुआ। भगवान के मस्तक पर दूध, दही, घी, सर्वोषधि, लालचंदन, सफेद चंदन, केशर, पुष्पवृष्टि, नारियल जल आदि से महामस्तकाभिषेक किया गया। अंत में विश्व में शांति की कामना हेतु भगवान की शांतिधारा की गई। शांतिधारा पीठाधीश रवींद्र कीर्ति स्वामीजी द्वारा मंत्रोच्चार के साथ कराई गई। संपूर्ण मांगलिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन व प्रवीण चंद जैन द्वारा किया गया। सांयकाल में मंडल विधान, भगवंतों व माताजी की आरती की गई।

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