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नदियों के राज्य नीति बनाने की मांग, मसौदा तैयार

नदियों के राज्य नीति बनाने की मांग, मसौदा तैयार

सूबे में नदियों की बदहाली को देखते हुए नीर फाउंडेशन ने नदियों की राज्य नीति बनाने की पहल की है। इसके लिए संगठन ने देशभर के विषय विशेषज्ञों के साथ बैठकर उत्तर प्रदेश की नदी नीति का प्रारूप तैयार किया, जिसे मेरठ घोषणा पत्र का नाम दिया है। नदी नीति का यह प्रारूप प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को सौंप दिया। उन्होंने इस पर सकारात्मक पहल करने को कहा है।

नीर फाउंडेशन के साथ ही पश्चिमी यूपी में विभिन्न संगठन पिछले एक दशक से नदियों की बेहतरी के लिए कार्य कर रहे हैं। इसमें हिंडन, कृष्णी, काली पश्चिमी, काली पूर्वी, धमोला, पांवधोई, नागदेई, बूढ़ी गंगा और अन्य छोटी-छोटी नदियां शामिल हैं। नदियों के समक्ष उनमें बढ़ते प्रदूषण, पानी की कमी तथा अतिक्रमण जैसी समस्याएं हैं। नीर फाउंडेशन निदेशक रमनकांत त्यागी ने कहा कि इसमें सबसे अधिक प्रभावित छोटी और बरसाती नदियां हैं। बरसाती नदियों में जहां पानी का अभाव हो गया है वहीं ये नदियां एक गंदा नाला बनकर रह गई हैं।

रमन त्यागी का कहना है कि इन छोटी नदियों के प्रदूषित होने से गंगा-यमुना जैसी बड़ी नदियां भी बदहाल हो गई हैं। इनके प्रदूषण के असर से जहां भूजल प्रदूषित हुआ है वहीं इनके किनारे बसे गांवों, कस्बों व शहरों में जल-जनित जानलेवा बीमारियां पनप रही हैं। किनारे बसे गांवों की कृषि मिट्टी तथा खाद्यान्नों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बताया कि नदियों की उपरोक्त समस्याओं को देखते हुए तथा भविष्य की नदियों का एक खाका खींचते हुए उत्तर प्रदेश की नदी नीति का एक प्रस्तावित मसौदा तैयार किया है। इसको बनाने में देशभर के विषय विशेषज्ञ और नीति निर्माताओं का सहयोग लिया है।

प्रस्तावित नदी नीति के कुछ खास बिन्दू

- नदी में किसी भी तरह का शोधित और गैर-शोधित अवजल व ठोस अपशिष्ठ न डाला जाए।

- नदियों के प्रवाह की आजादी सुनिश्चित करने को नदी की जमीन नदी की ही रहनी चाहिए।

- नदी नीति के क्रियान्वयन को राज और समाज को आगे रखते हुए ऐसी समन्वित प्रणाली विकसित होनी चाहिए जिसमें दोनों की भूमिकाएं स्पष्ट परिभाषित हों।

- नदी का जल और भूजल एक-दूसरे के पूरक होते हैं। इसीलिए भूजल को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय समाज के साथ बोरिंग की गहराई सुनिश्चित होनी चाहिए।

- नदी पर बांध और तटबंध पर प्रतिबंधित होना चाहिए। नदियों की भू-सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करते हुए भू-आकृति से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

- बाढ को नहीं बाढ के विनाश को रोकने का प्रयास करना चाहिए। नदी की जैव-विविधता को प्राथमिकता देनी चाहिए न कि उपयोगिता को। नदी जल के सीधे इस्तेमाल पर रोक होनी चाहिए। प्रत्येक नदी का पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित किया जाए।

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