मेरठ: करण कौशिक हत्याकांड में 12 साल से इंसाफ का इंतजार, पथरा गई आंखें
Meerut News - - 11 सितंबर 2013 को सिविल लाइन में किया था करण कौशिक का कत्ल -
- 9 गवाहों की गवाही पर टिका है केस, खून से सने कपड़े कर दिए थे गायबमेरठ, प्रमुख संवाददातासितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगे की आग में जल रहा था और इसी दौरान मेरठ में सनसनीखेज करण हत्याकांड अंजाम दिया गया। सिविल लाइन के सुभाषनगर निवासी करण कौशिक की सलमान, सुहेल और ताज मोहम्मद ने हत्या कर लाश कब्रिस्तान में दबा दी थी। कत्ल के चार दिन बाद लाश जैसे ही बरामद हुई, शहर का माहौल गरमा गया था। सांप्रदायिक टकराव के हालात बन गए थे, लेकिन करण के परिजनों और पुलिस-प्रशासन की सूझबूझ से स्थिति संभल गई। करण की हत्या को 12 साल गुजर चुके हैं और परिवार को आज भी इंसाफ का इंतजार है।
तमाम अड़चनों के बाद भी यह केस अब आखिरी चरण में पहुंच चुका है और अभियोजन की ओर से साक्ष्य पूरे कराए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही केस में निर्णय होगा।सिविल लाइन के सुभाषनगर गली-2 निवासी राकेश कौशिक के बेटे करण कौशिक का मोबाइल को लेकर सलमान, सुहेल और ताज मोहम्मद से विवाद हो गया था। 11 सितंबर को तीनों ने मिलकर करण कौशिक को बहाने से शाह विलात कब्रिस्तान के पास बुलाया और यहीं पर फावड़े से वार कर हत्या कर दी। कत्ल करने के बाद आरोपियों ने पहले से खोदी गई एक कब्र में करण की लाश को दबा दिया था। करण के पिता राकेश कौशिक ने 12 सितंबर को करण की गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने 14/15 सितंबर को तीनों आरोपियों को दबोच लिया और आरोपियों की निशानदेही पर कब्र से करण की लाश बरामद की गई थी। इसी समय मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों की चपेट में था और जल रहा था। मेरठ में भी करण कौशिक की हत्या को दो संप्रदाय से जोड़कर देखा जा रहा था और माहौल काफी गरमा गया था। स्थिति ऐसी हो गई थी कि शहर में किसी भी समय अनहोनी हो सकी थी। करण के परिवार ने संयम दिखाया और कानून पर भरोसा जताया था। पुलिस प्रशासन ने भी लोगों को समझा बुझाकर शहर को बचा लिया था। केस में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। सुहेल चूंकि जुवेनाइल था, इसलिए उसकी फाइल अलग हो गई थी। बाकी दोनों आरोपियेां के खिलाफ 7 दिसंबर 2013 को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।----------------------------------केस लड़ने पर परिवार को दी गई धमकीकरण कौशिक हत्याकांड अभी न्यायालय में विचाराधीन है। इस मामले में शुरू से ही आरोपियों ने राकेश कौशिक पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया। आरोप है कि 2 फरवरी 2023 को आरोपियों ने फिर धमकी दी, जिसमें थाना मेडिकल में एफआईआर दर्ज की गई थी। 26 सितंबर 2024 को कचहरी में आरोपियों ने उन्हें धमकाया। जमानत निरस्तीकरण के लिए राकेश कौशिक ने हाईकोर्ट में आवेदन किया था, जिसके बाद ताज मोहम्मद और सलमान लंगड़ा की जमानत निरस्त कर दी गई थी।----------------------------------केस के अहम सबूतकरण पक्ष के अधिवक्ता प्रबोध शर्मा केस को शुरू से देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस केस में पुलिस के पास काफी अहम सबूत मौजूद थे। पुलिस ने आरोपियों की कॉल रिकार्डिंग(करण के मोबाइल पर आखिरी कॉल इन्हीं आरोपियों की थी), आरोपियों की निशानदेही पर आला कत्ल बरामद, हत्यारोपियों की निशानदेही पर शव बरामद किया गया था। केस में हत्या, साक्ष्य मिटाने, सामूहिक अपराध और साजिश की धाराएं लगाई गई थी। आरोपियों ने कोर्ट में खुद को जुवेनाइल घोषित कराने का प्रयास किया था और फर्जी दस्तावेज लगाए थे। हालांकि बाद नहीं बनी और जिस प्रिंसिपल ने ये फर्जी दस्तावेज जारी किए, उसके खिलाफ कोर्ट आदेश पर कार्रवाई की गई।----------------------------खून से सने कपड़े कर दिए थे गायबअधिवक्ता प्रबोध शर्मा ने बताया कि करण कौशिक हत्याकांड में शुरू से ही पुलिस ने करण कौशिक के खून से सने कपड़े बरामद किए थे। इसके अलावा आरोपियों ने भी अपने कपड़े छिपा दिए थे, जिन्हें बरामद किया गया था। इसे लिखापढ़ी में सील कर पुलिंदा बांधा गया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सनसनीखेज खुलासा हुआ कि खून से सने कपड़े गायब हो गए हैं। यह सब आरोपियों से मिलीभगत कर अंजाम दिया गया था। बाद में कोर्ट ने इस प्रकरण में कार्रवाई कराई थी।----------------------------9 गवाहों की गवाही पूरी, आखिरी चरण में है केसवादी पक्ष के अधिवक्ता प्रबोध शर्मा ने बताया कि केस में नौ महत्वपूर्ण गवाह और वादी राकेश कौशिक, अशोक कौशिक, पीयूष शास्त्री, मनीष कुमार शर्मा, प्रदीप गर्ग, जीत सिंह लोधी, पुनीत अग्रवाल, रिटायर्ड इंस्पेक्टर जयपाल सिंह और रिटायर्ड सीओ अजय कुमार अग्रवाल की गवाही पूरी हो चुकी है। आखिरी गवाही रिटायर्ड सीओ अजय कुमार अग्रवाल की 16 जनवरी 2025 को पूरी हो गई थी। अभियोजन ने साक्ष्य पूरे कराए हैं। केस अब आखिरी चरण में है। जल्द ही पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल सकता है।
लेखक के बारे में
Vinay Sharmaशॉर्ट बायो :
विनय शर्मा बीते 16 साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान मेरठ में वेस्ट यूपी में क्राइम बीट संभाल रहे हैं। वह मेरठ में क्राइम टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव :
विनय शर्मा प्रिंट मीडिया में प्रतिष्ठित नाम हैं और पत्रकारिता में 16 साल का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान की मेरठ यूनिट में बतौर चीफ क्राइम रिपोर्टर कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान में वर्ष 2016 से लगातार कार्यरत हैं और अपराध की बड़ी घटनाओं की कवरेज में मजबूत पकड़ रखते हैं।
कॅरियर का सफर :
विनय शर्मा ने अपना कॅरियर वर्ष 2010 में दैनिक जागरण से शुरू किया। यहीं से उन्होंने पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों को समझा। वर्ष 2016 में हिन्दुस्तान मीडिया से जुड़े और वेस्ट यूपी में काम शुरू किया। फिलहाल में वेस्ट यूपी में क्राइम संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
ग्रेजुएशन और मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट होने के बाद दैनिक जागरण में ज्वाइन किया। क्राइम की घटनाओं की कवरेज के साथ ही साफ्ट स्टोरी कवरेज भी कर रहे हैं।
विजन
अपराध और आतंकी घटनाओं की कवरेज में विनय शर्मा को गहरी समझ है। इन्होंने कई बड़े प्रकरण में एक्सक्लूसिव और ब्रेकिंग खबरें दी हैं। साथ ही कई बड़े मामलों में कवरेज भी दी है। विनय शर्मा का लक्ष्य है कि प्रमाणिक तथ्यों के आधार पर पाठकों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाई जाए।
विशेषज्ञता
अपराध, एंटी करप्शन, ईओडब्ल्यू, सीआईडी, सीबीआई और एंटी टेररिस्ट स्क्वायड समेत जेल बीट कवरेज।
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